INX MEDIA: पी चिदंबरम 24 अक्टूबर तक ED हिरासत में भेजे गए

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर. दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया डील मामले में चिदंबरम को 24 अक्टूबर तक की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया है. ईडी ने चिदंबरम की 15 दिनों की हिरासत की मांग की थी.

सुनवाई शुरु होते ही सीबीआई ने चिदंबरम की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाने की मांग की. सीबीआई ने कहा कि चिदंबरम को इस मामले में जमानत नहीं मिली है और उनकी न्यायिक हिरासत आज खत्म हो रही है.

उसके बाद कोर्ट ने सीबीआई के मामले में चिदंबरम की न्यायिक हिरासत 24 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया. ईडी की हिरासत की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चिदंबरम ने पहले सरेंडर करने के लिए याचिका दायर की थी लेकिन कोर्ट ने पाया था कि वो प्री-मैच्योर थी.

उस समय ईडी को पूछताछ की जरूरत नहीं थी, इसलिए हमने विरोध किया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई है. उन्होंने कहा कि ईडी की हिरासत में मांग करना मैकेनिकल नहीं है बल्कि मनी लांड्रिंग के मामलों में अपराधों में लिप्त होने की जांच करने के लिए है.

ईडी की जांच सीबीआई की जांच से बिल्कुल अलग है. चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था चिदंबरम की तत्काल हिरासत जरूरी है. जब उन्होंने सरेंडर किया तो वो कहते हैं कि उनकी जरूरत नहीं थी.

जब चिदंबरम न्यायिक हिरासत में थे, उस समय हमसे सवाल क्यों नहीं पूछे गए. ईडी की ओर से दो साल पहले ईसीआईआर दर्ज किया गया. वे दो साल तक क्या कर रहे थे. वे पांच सितंबर तक यही कह रहे थे कि उन्हें हिरासत नहीं चाहिए और अब अचानक 15 दिनों की हिरासत मांग रहे हैं, मैं इसका विरोध करता हूं.

सिब्बल ने कहा कि सीबीआई के मामले में चिदंबरम 60 दिनों की हिरासत में रहे, और अब ईडी उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है. ईडी के पास 5 सितम्बर के पहले भी साक्ष्य थे, जिसके आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से हिरासत की मांग की थी.

इसका तुषार मेहता ने विरोध किया और कहा कि ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत है, ये नहीं कहा था कि हिरासत की तत्काल जरूरत है.

ईडी ने 5 सितम्बर को कहा था कि उन्हें कुछ गवाहों का परीक्षण करना है तभी उनकी हिरासत की मांग की जा सकती है. इस मामले में अंतिम गवाह से 9 अक्टूबर को पूछताछ की गई और तब 14 अक्टूबर को हिरासत की मांग की गई.

तब सिब्बल ने कहा कि हम 15 दिनों की हिरासत की मांग का विरोध करते हैं. सवाल है कि आखिर उन्होंने पहले गवाहों से पूछताछ क्यों नहीं की, जब गवाह उपलब्ध था. सुनवाई के दौरान चिदंबरम की ओर से ईडी हिरासत दिए जाने की स्थिति में सीबीआई मुख्यालय की तरह की सुविधाएं देने की मांग की गई.

याचिका में चिदंबरम की सुरक्षा के लिहाज से सीबीआई मुख्यालय में ही पूछताछ करने, घर का खाना, पश्चिमी टॉयलेट, दवाइयां, चश्मे और परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत की मांग की गई.

इस अर्जी पर तुषार मेहता ने कहा कि हमें घर का खाना, पश्चिमी टॉयलेट, दवाइयां और परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत देने में कोई दिक्कत नहीं है. हम एयरकंडीशंड कमरे का विरोध करते हैं.

16 अक्टूबर को कोर्ट ने पी चिदरंबरम के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया था. ईडी ने कोर्ट को बताया था कि उसने चिदंबरम से पूछताछ की है और उन्हें गिरफ्तार किया है. उसके बाद कोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि वो चिदंबरम को 17 अक्टूबर को कोर्ट में पेश करें.

ईडी की ओर से वकील अमित महाजन ने कोर्ट को बताया था कि ईडी के अधिकारियों ने चिदंबरम के बयान भी दर्ज किए हैं. पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया डील के सीबीआई से जुड़े मामले में पिछले 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था.

आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को एफआईआर दर्ज की थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से मंजूरी देने में गड़बड़ी की गई. इसके बाद ईडी ने 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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