नाट्यशास्त्र से खास परिचय… जानें नाट्सशास्त्र के सभी अध्यायों के बारे में…

डॉ. ब्रजवल्लभ मिश्र

नाट्यशास्त्र में 36 अध्याय हैं या 37। यह विवाद 12वीं शताब्दी में अभिनव गुप्त के सामने भी रहा है. जब अभिनव गुप्त ने नाट्यशास्त्र की ‘अभिनव भारती’ नामक टीका लिखनी शुरू की, तब प्रारंभ के मंगलाचरण में उन्होंने स्वयं लिखा कि मैं भरतमुनि कृत ‘नाट्यशास्त्र’ के 36 अध्यायों की व्याख्या लिख रहा हूं.

मगर जब ग्रंथ का अंत किया, तब लिखा सैंतीसवें अध्याय की समाप्ति यहां करता हूं. यहीं से भ्रम बना हुआ है कि नाट्यशास्त्र के बारे में पूरी और सही जानकारी कम लोगों के पास है. इसलिए सर्व साधारण से ग्रंथ के सभी 37 अध्यायों का परिचय कराया जा रहा है.

अध्याय एक पहले अध्याय में ग्रंथकार ने सबसे पहले भगवान शिव को प्रणाम किया है. उसके बाद वह कहता है कि एक छुट्टी के दिन स्रान ध्यान से निवृत होकर ऋषियों ने मुझसे पूछा कि नाटयवेद की उत्पति कैसे और क्यों हुई?

भरत ने ऋषियों को उत्पति का इतिहास बताया कि देवताओं की प्रार्थना पर ब्रह्माजी ने चारो वेदों और चारों उपवेदों का ध्यान करने उनसे सामग्री ली और पंचमवेद के रूप में नाट्यवेद की सृष्टि की. ब्रह्मा जी की आज्ञा के अनुसार मैंने अपने सौ पुत्रों को इसकी शिक्षा दी.

श्रंगार रस के प्रयोग के लिए इसमें स्त्रियों की कमी थी. बह्मा जी ने 24 अप्सराएं दी. नारद जी गान्धर्ववेद की शिक्षा दी. भगवान शिव की आक्षा पर तण्डु ने मुझे नृत्य की शिक्षा दी.

सभी देवी देवताओं ने हमें आशीर्वाद दिया और तभी से नाट्य की प्रतिष्ठा यज्ञ और जप के समान हो गई. इसके द्वारा मनुष्य को शुभ फल प्राप्त होता है और उसे सत्य और सदाचार की शिक्षा मिलती है. 

अध्याय दो

दूसरे अध्याय में भरत बड़े, बीच के और छोटे अर्थात 3 प्रकार के प्रेक्षागृह अर्थात नाट्यशालायें बनाने के विधान विस्तार से समझाता है. रंगशाला बनाने से पहले भूमि और मिट्टी की परीक्षा और भूमि साफ करने के नियम बताता है.

नाप के लिए वह हाथ या डण्डे का नाप तय करता. कई तरह के नक्शे बताता है तथा रंग मंच और दर्शकों के बैठने का विधान समझाता है. 

यह भी बताता है कि अमुक अमुक नक्षत्रों में भूमिपूजन और रंगशाला बनाने का काम शुरू करना चाहिए ध्वनि के निर्देश छत बनाना समतल भूमि बनाना लकड़ी की सज्जा और अलग-अलग दिशाओं में देवताओं की स्अथालग दिशाओं में देवताओं की स्थापना के निर्देश देता है.

पूरा लेख पढ़ें नवोत्थान के अगस्त अंक में…

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