International Labour Day 2020: आखिर 1 मई को ही क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस, जानिए इसका इतिहास

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नई दिल्ली. आज एक मई है और दुनिया के कई देश अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Workers’ Day) मनाते हैं. इस दिन को लेबर डे, इंटरनेशनल वर्कर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है.

ये दिन पूरी तरह से मजदूरों को समर्पित होता है. इस दिन भारत समेत कई देशों में श्रमिकों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम किया जाता है. ये दिन मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है.

बता दें कि एक मई को ही दुनियाभर के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटों में बदल दिया गया था. मजदूर दिवस के दिन दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में छुट्टी होती है.

भारत में कब हुई थी शुरूआत

भारत में मजदूर दिवस की शुरूआत चेन्नई में 1 मई 1923 को हुई थी. लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान के नेता और कामरेड सिंगारावेलु चेट्यार के नेतृत्व में मद्रास में पहली बार मजदूर दिवस मनाया गया.

चेट्यार के नेतृत्व में मद्रास हाईकोर्ट के सामने बड़ा प्रदर्शन किया गया था और इस दिन को पूरे भारत में मजदूर दिवस के रुप में मनाया जाने का संकल्प लिया गया. यही वो मौका था जब पहली बार लाल रंग झंडा मजदूर दिवस के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया था.

दुनिया में कब से शुरू हुआ मजदूर दिवस

1 मई सन् 1886 को अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर ये फैसला किया कि वो 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे. इस मांग के साथ उन्होंने हड़ताल करना शुरू कर दिया.

हड़ताल के दौरान शिकागों के हेय मार्केट में एक बम धमाका हुआ था जिसके बाद वहां की पुलिस ने मजदूरों पर गोली चलानी शुरू कर दी जिसमें 100 से ज्यादा की तादात में मजदूरों की मौत हो गई बहुत से घायल हो गए.

शिकागो में शहीद हुए मजदूरों की याद में पहली बार मजदूर दिवस मनाया गया. इसके बाद पेरिस में 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ऐलान किया गया कि हेय मार्केट नरसंहार में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर मनाया जाता है. इसी घटना की याद में मजदूर दिवस की शुरुआत हुई.

मजदूर वर्ग इस दिन पर बड़ी-बड़ी रैलियों व कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO) द्वारा इस दिन सम्मेलन का आयोजन किया जाता है. इसके अलावा कई देशों में मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की जाती है.

  • मैं मजदूर हूं मजबूर नहीं
  • ये कहने में मुझे शर्म नहीं
  • अपने पसीने की खाता हूं
  • मैं मिट्टी को सोना बनाता हूं