पी.टी. ऊषा के नाम दर्ज हुई बड़ी उपलब्धि, इस अवॉर्ड के लिए हुई नॉमिनेट

खेल डेस्क. इंटरनेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन ने भारत की पूर्व एथलीट और ओलम्पियन पी. टी. उषा को वेटरन पिन अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है. इस बारे में खुद पीटी उषा ने गुरुवार को ट्वीटर पर यह जानकारी दी.

उन्होंने ट्वीट किया करते हुए लिखा कि वर्ल्ड एथलेटिक्स की लंबी और मेधावी सेवा के लिए वेटरन पिन! इस अतुल्य सम्मान के लिए शुक्रिया. ट्वीट के साथ ही उन्होंने आईएएफ के सीईओ जॉन रिजोन के भेजे गए पत्र की भी फोटो पोस्ट की.

पी. टी. उषा को 24 सितंबर में कतर में शुरू होने वाली इंटरनेशनल एथलेटिक्स फेडरेशन की 52वीं कांग्रेस में शामिल होने के लिए इन्वाइट भेजा गया है. इसी दौरान एक समारोह में पी. टी. उषा को सम्मानित किया जाएगा.

पी.टी. उषा 1984 में लॉस एंजेलिस ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में पहुंची थीं. पी. टी. उषा ऐसी पहली भारतीय महिला एथलीट है जो किसी ओलंपिक के फाइनल तक पहुंचीं. हालांकि बढ़िया प्रदर्शन के बावजूद उषा मेडल जीतने में नाकाम रही.

पी. टी. उषा के लिए उनकी जिंदगी का ये सबसे सबसे यादगार लम्हा था. 1984 लॉस एंजेल्स ओलंपिक में उषा 0.01 सेकेंड के अंतर से ओलंपिक मेडल जीतने से चूक गईं थीं. 400 मीटर बाधा दौड़ में उषा 55.42 सेकेंड के साथ चौथे स्थान पर रहीं थी.

मॉस्को ओलंपिक के समय पी. टी. उषा सिर्फ 16 साल की थीं. 1984 में उषा को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया. साल 1984 में उन्हें पद्मश्री अवार्ड भी दिया गया. वहीं साल 1985 में वह ग्रेटेस्ट वूमन एथलिट जकार्ता एशियन एथलिट मीट में चुनी गईं.

1983 में हुई ओपन नेशनल चैंपियनशिप में उषा ने 23.9 सेकेंड में 200 मीटर और 53.6 सेकेंड में 400 मीटर की दौड़ पूरी कर नया रिकॉर्ड बना दिया. पी. टी. उषा को गोल्डन गर्ल के नाम से भी जाना जाता हैं.

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