आज दुनिया भर में मनाया जा रहा है International Anti Drugs Day, जानिए इसके दुष्प्रभाव…

नई दिल्ली. हर साल 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है. इस दिन नशे की चपेट में आने वाले लोगों को जागरुक किया जाता है.

नशीली दवाओं के सेवन और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है. हाल के दिनों में नशा करने वालों की संख्या बढ़ी है. लोगों के लाइफस्टाइल ने उन्हें नशे की तरफ और धकेलता जा रहा है.

उजड़ जाती है जिंदगी- नशा एक ऐसी बीमारी है जिसमें आज की युवा पीढ़ी डूबी हुई है. आज के युवा शराब, सिगरेट, ड्रग्स और तंबाकू जैसे जहरीली चीजों का सेवन करके नशे की लत का शिकार हो रहे हैं. ड्रग की लत के बाद नशे के आदी हुए तीन लोगों के परिवारों की हंसती-खेलती दुनिया उजड़ जाती हैं.

इनसे भी होता है नशा- लोग सोचते हैं कि वो बच्‍चें कैसे नशा कर सकते है जिनके पास खाने को भी पैसा नहीं होता. परंतु नशा करने के लिए सिर्फ मादक पदार्थो की ही जरुरत नहीं होती, बल्कि व्‍हाइटनर, नेल पॉलिश, पेट्रोल आदि की गंध, ब्रेड के साथ विक्स और झंडु बाम का सेवन करना, कुछ इस प्रकार के नशे भी किए जाते हैं, जो बेहद खतरनाक होते हैं.

महिलाएं में भी बढ़ रहीहै नशे की लत- नशे की लत ने इंसान को उस स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब व्‍यक्‍ति मादक पदार्थों के सेवन के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, वह नशे के लिए जुर्म भी कर सकता है. नशे के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं है.

महिलाओं भी नशे का सेवन करती हैं. व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में तनाव, प्रेम संबंध, दांपत्य जीवन और तलाक आदि कारण, महिलाओं में नशे की बढ़ती लत के लिए जिम्मेदार है.

हेल्थ का होता है बड़ा नुकसान- मादक पदार्थों के सेवन से सबसे बड़ी हानि, स्वास्थ्य की हानि है. इससे आपके शरीर के कई अंगों पर एक साथ विपरीत असर पड़ता है. खास तौर से यह आपके दिमाग को भी अपनी चपेट में ले लेता है.

नशा करने वाला व्‍यक्‍ति हमेशा चिढ़ा-चिढ़ा सा रहता है. वो मानसिक तनाव से ग्रसित होता है. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति सदैव अपने ख्‍यालों में ही रहता है, उसे अपने आस-पास के माहौल से ज्‍यादा मतलब नहीं होता है.

नशा करने वाला व्‍यक्‍ति आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक सभी से कमजोर होता है. इसके साथ ही नशे की लत का शिकार व्यक्ति अपने परिवार से भी दूर होता चला जाता है.

7 दिसंबर 1987 को हुआ था प्रस्ताव पारित- ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ ने 7 दिसंबर 1987 को यह प्रस्ताव पारित किया था और तभी से हर साल लोगों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इसे मनाया जाता है.

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