CWC19: वर्ल्ड कप में कार्तिक के साथ हुई नाइंसाफी

  • वर्ल्ड कप के लिए सेलेक्शन होने से पहले टीम इंडिया में नंबर चार पर बल्लेबाजी को लेकर काफी चर्चा हुई.
  • कार्तिक को वर्ल्ड कप में खेलने के पर्याप्त मौके मिल ही नहीं पाए .

खेल डेस्क. टीम इंडिया का वर्ल्ड कप 2019 का सफर अब खत्म हो चुका हैं. टूर्नामेंट की शुरुआत से ही विराट कोहली नंबर 4 की समस्या को नहीं सुलझा पाए. इसी का नतीजा है कि टीम को सेमीफाइनल जैसे अहम मुकाबले में यह नहीं मालूम था कि आखिर किस खिलाड़ी को नंबर 4 पर भेजा जाए.

इसी का खामियाजा टीम इंडिया को हार के रूप में भुगतना पड़ा. वर्ल्ड कप के लिए सेलेक्शन होने से पहले टीम इंडिया में नंबर चार पर बल्लेबाजी को लेकर काफी चर्चा हुई. इसके बाद चयनकर्ताओं ने विजय शंकर, दिनेश कार्तिक, लोकेश राहुल और केदार जाधव को चुना था. लेकिन इनमें से किसी को भी नियमित तौर पर चार नंबर खेलने का मौका नहीं मिला.

मगर इन सब खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा नाइंसाफी दिनेश कार्तिक के साथ हुई. वर्ल्ड कप से पहले दिनेश कार्तिक ने नंबर 4 पर भारत को कई मैच जिताए. लेकिन फिर भी उन्हें वर्ल्ड कप में आखिरी विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किया गया. टीम मैनजमेंट ने अगर उन्हें सही वक्त पर मौका दिया तो शायद भारत वर्ल्ड कप में बेहतर स्थिति में होता.

15 साल बाद वर्ल्ड कप में मौका पाने वाले दिनेश कार्तिक ने सेमीफाइनल मैच में 25 गेंदें खेलकर महज 6 रन बना सके. इस वर्ल्ड कप में कार्तिक ने 3 मैच की दो पारियों में सिर्फ 14 रन बनाए. इस वर्ल्ड कप में उनका बेस्ट स्कोर 8 रन रहा. जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दिनेश कार्तिक के करियर का आखिरी मैच भी हो सकता है.

लेकिन आप सोचिए जिस खिलाड़ी को इतने लंबे वक्त के बाद भी टीम में तब खिलाया जाए और उन्हें बैटिंग करने के लिए पर्याप्त समय न दिया जाए तो सेमीफाइनल मुकाबले में कार्तिक से खास प्रदर्शन की उम्मीद करना बेईमानी होगा. ये बात अलग है कि अगर उन्हें टूर्नामेंट की शुरूआत से खिलाया जाता तो अलग विश्वास के साथ मैदान पर उतरते.

इस बात से सभी वाकिफ है कि कार्तिक में काबिलियत की कोई कमी नहीं है. लेकिन कार्तिक के साथ टीम मैनजमेंट का पक्षपाती रवैया वर्ल्ड कप जैसे अहम टूर्नामेंट में टीम पर इतना भारी पड़ गया. जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो. वर्ल्ड कप के शुरूआती 7 मुकाबलों में कार्तिक को टीम में शामिल ही नहीं किया गया.

जबकि टीम में शिखर धवन के बैकअप के तौर पर शामिल हुए पंत को उनसे पहले नंबर चार पर खेलने का मौका दिया गया. ये बात अपने आप में समझ से परे है कि कोहली ने पंत के वर्ल्ड कप टीम में न होने पर कहा था कि उनके पास अभी धैर्य की कमी है. इसलिए हमने कार्तिक के अनुभव को तरजीह दी है.

इसके बावजूद भी ऋषभ पंत को वर्ल्ड कप में कार्तिक से ज्यादा मैच खेलने का मौका मिला और वे ज्यादा प्रभावी भी साबित नहीं हो सके. अगर कार्तिक को वक्त से टीम में मौका दिया जाता और उनका रोल तय किया जाता तो वाकई कार्तिक टीम इंडिया की नंबर चार की समस्या को सुलझा सकते थे.

लेकिन टीम मैनजमेंट अपनी जिद पर अड़ा रहा और कार्तिक को इतने मौके मिल ही नहीं पाए. जिनमें वो दिखा सकते कि उनकी बल्लेबाजी और प्रतिभा का कोई दूसरा सानी नहीं है. खैर जब टीम इंडिया का वर्ल्ड कप अभियान खत्म हो चुका है ऐसे में इस बात से खुद कार्तिक भी अच्छे से वाकिफ होंगे कि अब शायद ही टीम इंडिया में फिर खेलने का मौका मिले.

कार्तिक भले ही यहां से निराश होकर क्रिकेट से रिटायरमेंट ले मगर उनके बार-बार टीम में वापसी की कहानी उन खिलाड़यों के लिए प्रेरणा का काम करेगी जो एक खुद को हार की दहलीज पर खडे पाते है. असल में कार्तिक ऐसे खिलाड़ी है जो जितने काबिल थे उन्हें उतना ही नाकाबिल भी समझा गया. इसलिए कार्तिक टीम इंडिया के सबसे बदकिस्मत खिलाड़ी भी है.

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