सीमा विवाद के बावजूद भारत करेगा नेपाल की मदद, पशुपतिनाथ मंदिर के लिए देगा 2.33 करोड़

DDDD
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on whatsapp
WhatsApp

नई दिल्ली. नेपाल (Nepal) से सीमा विवाद के बावजूद भारत (India) ने पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए मदद को हामी भर दी है. काठमांडू मेट्रोपॉलिटिन सिटी नेपाल सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार अगले 15 महीने के अंदर इसका निर्माण करेगी.

राजनीतिक संबंधों में कड़वाहट नहीं चाहता भारत- भले ही नेपाल ने भारत की भावनाओं की कद्र न करते हुए भारत के भूभाग को अपने नक्शे में दिखा दिया हो, किन्तु भारत अपने इस पड़ोसी के साथ कूटनीतिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों में कभी भी कड़वाहट नहीं चाहता है. इसलिए भारत नेपाल की मदद करने जा रहा है.

पशुपतिनाथ मंदिर के लिए भारत देगा करोड़ों- नेपाल से तल्खी के बाद भी भारत ने काठमांडू स्थित विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से अत्याधुनिक सैनिटेशन सुविधा का निर्माण कराने का फैसला लिया है. इस परियोजना का निर्माण ‘नेपाल-भारत मैत्री विकास साझेदारी’ के तहत भारत की उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास योजना के तौर पर होगा.

ज्ञापन पर किए गए साइन- पशुपतिनाथ मंदिर (Pahsupatinath Mandir) में स्वच्छता केंद्र के निर्माण के लिए भारतीय दूतावास, नेपाल का संघीय मामला मंत्रालय और सामान्य प्रशासन और काठमांडू महानगरीय शहर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए गए.

ये मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के तहत भी सूचीबद्ध है. यहां पर भारतीय दूतावास (Embassy of India) की ओर से जारी बयान के मुताबिक पहल के तहत, भारत ने स्वच्छता केंद्र के लिए 3.72 करोड़ नेपाली रूपये की आर्थिक हेल्प देने की प्रतिवद्धता जताई है.

नेपाल का सबसे बड़ा मंदिर- पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल का सबसे बड़ा मंदिर है. ये बागमती नदी के दोनों तरफ फैला हुआ है. इस मंदिर में हर रोज नेपाल और भारत से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद- भारत की ओर से सहायता ऐसे समय में की जा रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है. नेपाली संसद (Nepal Parliament) के निचले सदन ने भारत के उत्तराखंड के लिपुलेख, कालापानी और लिमपियाधुरा को अपने नए मानचित्र में शामिल करने के लिए संविधान में संशोधन के उद्देश्य से एक विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया. इस कदम का भारत ने विरोध किया था.