पूरे देश की नजर महाराष्ट्र पर

मोहन सहाय

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार का मानना है कि कांग्रेस और एनसीपी के बीच हुआ गठबंधन ही राज्य में भाजपा-शिवसेना के गठबंधन को हरा पाने के लिए पर्याप्त नहीं है. 

माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और एनसीपी के बीच सीट बंटवारे की बात को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से हुई मुलाकात के दौरान पवार ने राहुल गांधी को अपने आकलन से अवगत कराया था. 

वे महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ राज्य के कुछ अन्य छोटे दलों को भी लेना चाहते थे. किसी वजह से ऐसा नहीं हो सका. 

मुश्किल यह है कि भाजपा-शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे के बाद भी दोनों में कुछ हद तक असहजता बनी हुई है. इसकी चर्चा आगे करेंगे, पहले हम महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की चुनावी संभावनाओं की पड़ताल करते हैं.

अस्सी लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र लोकसभा में सबसे अधिक 48 सांसदों को भेजता है. यहां लोकसभा चुनाव के पहले चरण में राज्य की सात सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा.

 यहां का चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा-शिवसेना गठबंधन और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच ही है. चुनावी समर में उतरी अन्य पार्टियों को यहां बड़ी जीत मिलने की उम्मीद नहीं है. 

इसके बावजूद एनडीए और यूपीए के अलावा चुनाव मैदान में मौजूद अन्य छोटे दलों के पास इतना जनाधार तो जरूर है कि वे चार प्रमुख दलों भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के उम्मीदवारों की चुनावी संभावनाओं को बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

शरद पवार इस बार चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. अपने आप में ये बात उनकी अपनी पार्टी एनसीपी के साथ ही कांग्रेस को भी निरुत्साहित करने वाली है. 

उम्मीद की जा रही थी कि पवार अपने गढ़ बारामती से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन इस सीट के लिए उन्होंने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को चुना है. बारामती पवार का गढ़ रहा है. 

इसलिए ये यह कहना गलत होगा वो भाजपा-शिवसेना गठबंधन से हारने के डर से चुनावी मुकाबले से हट गए हैं. महाराष्ट्र में चुनाव की चर्चा करने पर राज्य का दूसरा प्रमुख नाम नितिन गडकरी का है, जो अपने गृह क्षेत्र नागपुर से चुनाव लड़ रहे हैं.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 1–15 अप्रैल के अंक में…

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