भारत में प्रगति के पथ पर चल रहा है पर्यटन – प्रहलाद पटेल

भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक सुंदरता पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित करती रही है, लेकिन से पूर्ववर्ती सरकारों ने सही से समझने का प्रयास नहीं किया. पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिस नये भारत का निर्माण हो रहा है.

उसमें पर्यटन हमारी प्राथमिकताओं में है. भारत को समझने और देखने में हमारा मंत्रालय पर्यटकों के सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में निरंतर तत्पर है. पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद पटेल से सौरव राय की भारत में पर्यटन की नीतिगत पहलों पर विशेष बातचीत. दुनिया के सभी देश पर्यटन और पर्यटकों को लेकर गम्भीर है.

जब उनसे पूछा गया कि भारत सरकार पर्यटन को लेकर कितना गम्भीर है? तो उन्होंने जवाब दिया कि मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री के बोलने के बाद एक बात स्पष्ट हो गई है कि प्रधानमंत्री और सरकार पर्यटन को लेकर कितना संवेदनशील है.

यह बात प्रधानमंत्री ने ह्यमन की बातह्ण और लाल किले, दोनों ही माध्यमों से स्पष्ट कर दिया है. इसके लिए जो खाका उन्होंने बनाया है, चाहे वह स्वदेश दर्शन का हो चाहे ग्लोबल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना हो.

प्रधानमंत्री खुद भी जितने देशों में गये हैं उसमें उन्होंने अपनी संस्कृति और पर्यटन को जिस प्रकार से प्रचारित किया है वह बताता है. वह इन सब को लेकर कितना गम्भीर हैं. एक तरह से वे पर्यटन के ब्रांड एंबेसडर हैं.

मुझे लगता है कि हमारी सरकार की लाइन बहुत साफ है. दिशा भी सही है उसका प्रमाण यह है कि हमारी रैंकिंग में सुधार हुआ है. 2013 में भारत विश्व रैकिंग में 60 वें स्थान पर था. फिलहाल हम 36 वें स्थान पर पहुंच गये हैं.

इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि यह रैंकिंग बताता है कि हम इसको लेकर कितना गम्भीर है. पर्यटन के क्षेत्र में सुरक्षा एक अहम मुद्दा है. सरकार की क्या योजना है? उन्होंने कहा कि देखिए, जब मैंने मंत्री पद स्वीकार किया था तो मेरा सबसे पहला उद्देश्य था, धन से ज्यादा धारणा बदलने की जरूरत है.

मैं भी जानता हूं कि पर्यटन के क्षेत्र में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण घटक है. भारत में पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा हमारा प्राथमिक उद्देश्य है. इसके लिए हमने राज्य और केंद्र के मध्य संवाद के स्तर को बढ़ा कर सुरक्षा के तंत्र को बेहतर करने का प्रयास किया है.

इसमें जरूरी है कि जो हमारे सहयोगी संगठन हैं. उनको भी अपने दायित्व को समझ कर के पर्यटन और पर्यटकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए. जैसे रेल में यात्रा करते समय किसी पर्यटक के साथ कुछ घटाता है तो वहां सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की होती है.

वैसे ही किसी राज्य में अगर पर्यटक जाएगा तो वहां की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. जितनी भी यात्रा कराने वाली कम्पनी है उनकी भी जिम्मेदारी है. मुझे लगता है कि हमारे पास सीधी जवाबदेही तो किसी बात पर नहीं है लेकिन नैतिक जिम्मेदारी हमारी है.

जिसका हम निरंतर निर्वहन कर रहे हैं. जब भी कहीं किसी पर्यटक के साथ कोई घटना घटेगी तो वह यही कहेगा कि भारत में मेरे साथ ऐसा हुआ. इसलिए सुरक्षा व्यवस्था एक अहम मुद्दा है.

इसमें जनता का भी शामिल होना जरुरी है. जैसे किसी पर्यटक के साथ कुछ घटना हुई और लोगों ने उसका विरोध किया या पर्यटक का साथ दिया तो वह अपने देश जाकर यही कहेगा की एक घटना तो घटी पर लोग अच्छे थे.

यह जो बदलाव है यह पूरी तरह से धारणा का बदलाव है और इसमें सबकी जिम्मेदारी बनती है. मैं इस बात से सहमत हूं कि यह संदेश पूरी दुनिया में जाना चाहिए कि भारत में आया हुआ पर्यटक पूर्णत: सुरक्षित है.

Leave a Reply

%d bloggers like this: