भारत ने 50 साल पहले हुए अपमान का ऐसे लिया बदला

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान दुनिया के तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुंह की खा रहा है. इस कड़ी में उसके करीबी मूल्क भी उसके साथ खड़े होने से कतरा रहे हैं. अभी वह UN और IFATF के मंच पर मिले शमिंदर्गी से उबरा भी नहीं होगा कि उसे एक और संस्था से निराशा हाथ लगी.

यह संस्था है OIC यानी इस्लामी सहयोग संगठन. पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है. पाकिस्तान को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि ये संस्था भी उसे इस मुश्किल खड़ी में अकेले छोड़ देगी. उसके तमाम प्रयासों के बावजूद वह भारत को समिट में शामिल होने से नहीं रोक सका.

पाकिस्तान के लिए ये सबसे शर्मनाक स्थिति बन गई. वो महज इस सम्मेलन का बहिष्कार ही कर सका. ये पाकिस्तान ही था जिसने आज से 50 साल पहले भारत को OIC के सम्मेलन में मिले न्यौते को निरस्त करवाकर भारत को शमिंदर्गी झेलने पर मजबूर किया था.

पाकिस्तान लगातार भारत की इस संस्था में किसी भी भागीदारी का सख्त विरोध करता रहा है. लेकिन संयुक्त अरब अमीरात की तरफ से सुषमा स्वराज का वहां राजकीय सम्मान किया जाना , यह दिखाता है कि चीजें अब बदल रही हैं और ये कतई पाकिस्तान को हजम नहीं होने वाला.

ओआइसी में अभी तक पाकिस्तान की तूती बोलती रही है और उसके विरोध की वजह से ही भारत अभी तक इसका सदस्य नहीं बन पाया है.

OIC की स्थापना

OIC की स्थापना 1969 में हुई थी. इसके सदस्य देशों की संख्या 57 है, जिसमें से 40 मुस्लिम बहुल देश हैं. यूएन के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा संगठन है. पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल है. इसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में है.

यूएन और यूरोपीय यूनियन में यह स्थायी तौर पर प्रतिनिधिमंडल भेजता है. रूस और थाईलैंड जैसे देश भी इसके सदस्य हैं, जहां मुस्लिमों की संख्या ज्यादा नहीं है. जबकि मुस्लिम जनसंख्या के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद भारत इसका सदस्य नहीं है.

संगठन का मकसद

IOC की स्थापना दुनिया में इस्लामिक मूल्कों के हितों को सुरक्षित रखना और उनके सामने उतपन्न चुनौतियों से साझे तौर पर निपटना है. साथ ही सदस्य देशों में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाना भी इसका लक्ष्य है.

भारत को मिले न्यौते का कारण

विगत कुछ समय से भारत के मध्य-पूर्व समेत अन्य मुस्लिम देशों के साथ रिश्ते मजबूत हुए हैं. कतर ने 2002 में भारत के लिए पर्यवेक्षक के दर्जे का प्रस्ताव रखा था. पिछले साल बांग्लादेश व तुर्की ने भारत को संगठन का सदस्य बनाने को कहा था.

संगठन के अधिकतर देशों के साथ भारत के रिश्ते मधुर हैं. यूएई भारत में निवेश कर रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में मददगार बना है. भारत विश्व का तीसरा मुल्क है जहां सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है.

कृष्णा

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