चीन से द्विपक्षीय वार्ताओं के बीच एलएसी पर भारत अलर्ट

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  • महत्वपूर्ण चोटियों पर भारतीय सेना का दबदबा होने के बाद तनाव गहराया
  • चीन ने एलएसी पर हमले की रेंज में तैनात किए रॉकेट, मिसाइल से लेकर तोप

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भले ही मॉस्को में भारतीय समकक्ष डॉ एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करके मतभेदों को विवाद न बनने देने पर सहमति जताई हो लेकिन सीमा पर चीनी सेना ने किसी युद्ध जैसी तैयारियां तेज कर दी हैं. अब चीन ने एलएसी के आसपास रॉकेट, मिसाइल से लेकर तोप और फाइटर जेट की तैनाती कर दी है. यही वजह है कि जब भारतीय विदेश मंत्री ने अपने चीनी समकक्ष से पूछा कि अगर बातचीत से समस्या का हल निकालने की ईमानदार मंशा है तो फिर सीमा पर सैनिकों और हथियारों का जमावड़ा क्यों हो रहा है लेकिन चीनी मंत्री इसका जवाब नहीं दे सके. इसीलिए हालिया बातचीत के बाद भी भारत एलएसी पर सतर्क रुख अपना रहा है.

पैन्गोंग के उत्तरी इलाके की कुछ महत्वपूर्ण सामरिक चोटियों पर कब्जा करने बाद चीन इस गलतफहमी में था कि भारत उसकी सारी शर्तें मानने को मजबूर होगा. इसके उलट भारत ने पहले ही झील के दोनों ओर कई महत्वपूर्ण चोटियों पर मोर्चेबंदी मजबूत कर ली ताकि चीन भविष्य में सामरिक रूप से इन महत्वपूर्ण स्थानों पर भी कब्जा जमाकर भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश नहीं कर पाए. उत्तरी किनारे पर भी उन ऊंची चोटियों पर भारत की तैनाती है जहां से इलाके में चीनी सेना की सारी गतिविधियां साफ दिखाई पड़ती हैं. अभी तक सबसे अधिक ऊंचाई पर बैठे चीनियों को रणनीतिक लाभ मिलता था जिसकी वजह से उन्हें भारत की हर गतिविधि के बारे में जानकारी रहती थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो पायेगा.

​हाल ही में ​दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों ने रूस में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से अलग वार्ता करके सीमा पर शांति बहाली पर सहमति जताई है. दूसरी ओर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर युद्ध जैसी तैयारी शुरू कर दी है. चीन ने 50 हजार सैनिक इस क्षेत्र में तैनात किए हैं. यहां एयरकाफ्ट और मिसाइलों की बड़ी रेंज भी लगा दी गई है. चीन ने यहां सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, रॉकेट फोर्स और 150 फाइटर एयरक्राफ्ट भी तैनात कर रखे हैं. ये सब एलएसी पर हमले की रेंज के अंदर तैनात हैं. चीनी सेना ने लाइट टैंक और इन्फैन्ट्री कॉम्बैट वीइकल सीमा पार भेजने की कोशिश जिन्हें भारतीय सेना ने रोक दिया. अब पीएलए ने इस क्षेत्र में भारी सेना और हथियार तैनात करना तेज कर दिया है. देशभर के हिस्सों से लाकर एयर डिफेंस, सशस्त्र वाहन, पैराट्रूपर, स्पेशल फोर्स और इन्फैन्ट्री को इस क्षेत्र में लगाया गया है.

चीनी सेना के सेंट्रल थिएटर कमांड एयरफोर्स के एच-6 बॉम्बर और वाई-20 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग मिशन के लिए यहां तैनात किए हैं. लंबी-दूरी के ऑपरेशन, तैनाती के लिए अभ्यास और लाइव-फायर ड्रिल कई हफ्तों से जारी हैं. यह कार्रवाई उत्तर पश्चिम चीन के रेगिस्तान और दक्षिण पश्चिम चीन के तिब्बत क्षेत्र में की जा रही है. चीन सेंट्रल टेलिविजन ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि पीएलए के 71वें ग्रुप का एचजे-10 एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम पूर्वी चीन के जियांगसू प्रांत से गोबी रेगिस्तान पहुंचा है. PLA के तिब्बत मिलिट्री कमांड ने 4,500 मीटर की ऊंचाई पर संयुक्त ब्रिगेड स्ट्राइक एक्सरसाइज की है. पीएलए की 72वीं ग्रुप सेना ने उत्तर पश्चिम में पहुंचकर इसकी एयर डिफेंस ब्रिगेड ने लाइव-फायर ड्रिल की हैं जिनमें एंटी एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल पर अभ्यास किया गया​​.

​मास्को में​ ​भारत और चीन के ​​रक्षा मंत्रियों ​और इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद​ अब जल्द ही कोर ​कमांडर्स की 6वीं बैठक जल्द होने वाली है. विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ताओं में चीन ने अग्रिम चौकियों पर तैनाती हटाने और उचित दूरी बनाते हुए तनाव कम करने के लिए सहमति​ जताई है लेकिन जमीनी हालात इससे अलग दिखाई देते हैं.​ जानकारों का भी कहना है कि चीन के ​​रक्षा मंत्रियों​ और विदेश मंत्रियों से हुई हालिया बातचीत से बहुत ज्यादा उम्मीदें करना ठीक नहीं होगा बल्कि जब तक एलएसी पर तनाव के मामले में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आता, तब तक भारत को सतर्क रुख ही अपनाना चाहिए​.​​ ​इसीलिए भारतीय सेना ​भी ​चीन के साथ विवादित सीमा पर 100 से अधिक टैंक ले गई है.​​

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत