भारत-भूटान में बिजली परियोजना पर समझौता, जयशंकर ने की आपसी रिश्तों की तारीफ

भारत को घेरने के लिए चीन पड़ोसी देशों को पैसे दम पर अपनी तरफ झुकाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि चीन की इस चाल को अब भूटान समझ गया है. और उसने आज भारत के साथ एक बड़ा समझौता किया है. भूटान के इस कदम से चीन को करारा झटका लगा है.

भूटान और भारत के बीच आज (सोमवार को) 600 मेगावाट की जल विधुत परियोजना पर समझौता किया गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस परियोजना पर भूटान के साथ समझौता किया.

खोलोंगछु जल विद्युत परियोजना के तहत 600 मेगावाट की बिजली का उत्पादन किया जाएगा. भारत और भूटान के बीच यह पहला संयुक्त हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट होगा. समझौता भूटान सरकार और खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड के बीच हुआ है. परियोजना के 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है.

खोलोंगछु हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड एक संयुक्त उद्यम है, जो भूटान के ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (DGPC) और भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVNL) के बीच गठित है. इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और भूटान के बीच के संबंधों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अनोखा रिश्ता है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव है और हमारा एक साझा वैश्विक दृष्टिकोण है. जयशंकर ने कहा कि मैं भूटान और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत भारतीय कंपनी भूटान में बिजली उत्पादन करेगी.

सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश

इससे पहले सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे मैसेजेस को फैलाया गया था, जिससे भारत और भूटान के बीच संबंधों में खटास आ सकती है. सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि भूटान ने पानी को रोक दिया है, जिससे असम के किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया था, जिसमें भूटान अपनी नदी के बहाव को रोक रहा था. हालांकि सच्चाई ये थी कि नदी की सफाई की जा रही थी. दोनों ही देशों के अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया था.

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