• गठबंधन से सपा ने अंतिम क्षणों में दबंग नेता की छवि रखने वाले और पिछली बार तीसरे स्थान पर रहे अखिलेश सिंह को मैदान में उतारा है
  • गोरखपुर से सभासद के रूप में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले पंकज चौधरी पांच बार भाजपा से सांसद रह चुके हैं

लखनऊ

उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों में शुमार महराजगंज लोकसभा क्षेत्र की लड़ाई भी दिलचस्प हो गई है. यहां सातवें चरण में होने वाले मतदान के लिए चुनाव मैदान में भाजपा ने अपने पुराने दिग्गज नेता और महाराजगंज के सांसद पंकज चौधरी को उतारा है.

गठबंधन से सपा ने अंतिम क्षणों में दबंग नेता की छवि रखने वाले और पिछली बार तीसरे स्थान पर रहे अखिलेश सिंह को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने काफी किरकिरी होने बाद बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनु श्री का टिकट काटकर पिछली बार लोकसभा चुनाव में चौथे स्थान पर रहे हर्षवर्धन सिंह की बेटी और वरिष्ठ पत्रकार सुप्रिया श्रीनेत्र को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है.

अब जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, यह तो 23 मई को ही पता चल पाएगा. अंतिम समय तक उम्मीदवार के नाम पर उलझी रही सपा पर्चा दाखिला के अंतिम दिन अपने उम्मीदवार की घोषणा कर पाई. इससे वहां सपा नेताओं में काफी निराशा रही.

कुंवर अखिलेश प्रताप सिंह 1999 में सपा के टिकट पर संसद में पहुंचे थे. नौतनवां क्षेत्र के रहने वाले कुंवर लक्ष्मीपुर विधानसभा क्षेत्र से 1991 और 93 में विधायक भी रह चुके हैं. अपने भाई को भी कांग्रेस से एक बार विधायक बनवा चुके हैं. इनकी छवि काफी दबंग नेता के रूप में है. ये पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे.

भाजपा उम्मीदवार ने सभासद के रूप में शुरू किया था राजनीतिक कैरियर

गोरखपुर से सभासद के रूप में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले पंकज चौधरी पांच बार भाजपा से सांसद रह चुके हैं। इस समय वे महाराजगंज के सांसद हैं. इस लाेकसभा सीट पर भाजपा का काफी दबदबा रहा है.

2014 में इस लोकसभा सीट पर 23 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी के पंकज चौधरी और बसपा के काशीनाथ शुक्ला के बीच रहा. पंकज को कुल 4,71,542 वोट हासिल हुए तो बसपा के काशीनाथ को 2,31,084 मत मिले.

इस तरह से पंकज ने यह चुनावी जंग 2,40,458 मतों के अंतर से जीती थी। तीसरे स्थान पर 2,13,974 मत पाकर सपा के अखिलेश रहे। कांग्रेस के हर्षवर्धन चौथे स्थान पर रहे.

पांच विधानसभाओं में से चार पर भाजपा का कब्जा

महाराजगंज संसदीय सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महाराजगंज और पनियारा आते हैं। इसमें चार विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक सीट नौतनवां पर दबंग और विवादित नेता निर्दलीय उम्मीदवार अमनमणि त्रिपाठी का कब्जा है.

इसमें भी फरेंदा सीट पर ही भी भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह ने कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 2,354 मतों से हराया था. शेष तीन सीटों सिसवा, महाराजगंज और पनियारा में भाजपा उम्मीदवारों ने अपने विरोधियों को मात दी थी.

यहां की स्थिति के बारे में राजनीतिक विश्लेषक हर्ष वर्धन त्रिपाठी का कहना है कि इस बार भी विपक्ष की गलतियों के कारण ही भाजपा का पलड़ा भारी होता दिख रहा है. गठबंधन का अंतिम समय में उम्मीदवार घोषित किये जाने के कारण अंदरूनी कलह बढ़ रही है.

अखिलेश पिछली बार मात खा चुके हैं और तीसरे स्थान पर रहे थे. वे अपने समर्थकों में कितना उत्साह रख पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी. कांग्रेस उम्मीदवार हमेशा क्षेत्र के बाहर रही हैं. अब उनके पिता अपनी बेटी को वोट दिलवाने में कितना सफल होते हैं, यह देखने वाली बात होगी.

महाराजगंज के वरिष्ठ पत्रकार संजय पांडेय ने बताया कि गठबंधन ने देर से उम्मीदवार उतारकर अंदरूनी कलह को बढ़ा दिया है. कांग्रेस ने ऐन मौके पर उम्मीदवार बदलकर एक खास तबके को नाराज कर दिया है. कांग्रेस उम्मीदवार कभी क्षेत्र में रही भी नहीं हैं.

हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र

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