#Election2019: जंगीपुर सीट पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बेटे की साख दांव पर
  • बीजेपी ने कुमारगंज सीट से दो बार माकपा की विधायक रह चुकीं माफूजा खातून पर भरोसा जताया है
  • इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं. यहां तीसरे चरण में यानी 23 अप्रैल को मतदान है

कोलकाता: लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में जिन पांच सीटों पर मतदान होना है उसमें मुर्शिदाबाद की जंगीपुर लोकसभा सीट भी है. यहां अल्पसंख्यक आबादी निर्णायक भूमिका में हैं और कांग्रेस के टिकट पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे और मौजूदा सांसद अभिजीत मुखर्जी चुनावी मैदान में हैं.

23 अप्रैल को हैं तीसरे चरण की वोटिंग

बीजेपी ने कुमारगंज सीट से दो बार माकपा की विधायक रह चुकीं माफूजा खातून पर भरोसा जताया है. इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं. यहां तीसरे चरण में यानी 23 अप्रैल को मतदान है.

तीन पार्टियों के ये उम्मीदवार मैदान में

टीएमसी की ओर से खलीलुर्रहमान मैदान में है, जबकि माकपा ने जुल्फिकार अली को टिकट दिया है. ये सीट पारंपरिक तौर पर कांग्रेस और माकपा के कब्जे में रही है. बीजेपी उम्मीदवार खातून का इलाके में खासा प्रभाव है.

अभिजीत मुखर्जी हैं मौजूदा सांसद

बता दें कि इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सांसद रहे हैं. इसके बाद से ही मुस्लिम बहुल इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाने लगा. मौजूदा समय में यहां से प्रणब के बेटे अभिजीत मुखर्जी कांग्रेस के सांसद हैं.

जंगीपुर में 16,12,775 वोटर्स हैं

जंगीपुर में अल्पसंख्यक आबादी को निर्णायक माना जाता है. यहां कुल 16,12,775 मतदाता हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां 67 फीसदी अल्पसंख्यक हैं. 2014 में 80.43 फीसदी और 2009 में 85.95 फीसदी मतदान हुआ था. इसी जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर कांग्रेस को छोड़ अन्य सभी दलों ने अल्पसंख्यक तबके के उम्मीदवार खड़े किए हैं.

जंगीपुर की स्थापना जहांगीर ने की थी

जंगीपुर भागीरथी नदी के तट पर बसा हुआ है. इस शहर की स्थापना मुगल सम्राट जहांगीर ने की थी, इसीलिए इस शहर को जंगीपुर भी कहा जाता है. ब्रिटिश हुकूमत के शुरुआती दिनों में ये शहर सिल्क के कारोबार और ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक आवास का केंद्र हुआ करता था.

2009 में 7 लोकसभा सीटों को विधानसभा सीटों में बांटा गया

साल 2009 के परिसीमन में इस लोकसभा सीट को सात विधानसभा सीटों में बांट दिया गया. इनमें सूति, जंगीपुर, रघुनाथगंज, सागरदीघी, लालगोला, नवग्राम (अनुसूचित जाति) और खारग्राम (अनुसूचित जाति) शामिल हैं.

कुल आबादी 23,38,691 है

जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र की आबादी 23,38,691 है. इसमें 78.18 फीसदी जनसंख्या गांवों में और 21.82 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं. यहां की कुल आबादी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का अनुपात 15.87 और 1.93 फीसदी का है.

2014 में अभिजीत यहां के सांसद बने

साल 2009 में 1.28 लाख वोटों के अंतर से चुनाव जीतने वाले प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति बनने के बाद 2012 में इस सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उपचुनाव में उनके पुत्र अभिजीत कांग्रेस के टिकट पर जीते. उनकी जीत का अंतर महज ढाई हजार वोटों का था. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिलने वाले वोटों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई और अभिजीत आठ हजार वोटों से चुनाव जीते.

2014 में टीएमसी तीसरे नंबर पर रही

2009 और 2012 में यहां कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करने वाली तृणमूल कांग्रेस 2014 में तीसरे स्थान पर रही. कांग्रेस को 18.54 फीसदी जबकि भाजपा को 6.32 फीसदी वोट मिले थे.

तीन तलाक को मुद्दा बना रही बीजेपी

साल 2004 से 2014 तक कांग्रेस के राज में जंगीपुर की तस्वीर जस की तस रहने से लोगों का कांग्रेस से मोहभंग हुआ है. तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए बीजेपी की पहल यहां प्रभावी साबित हो सकती है. कांग्रेस के ढुलमुल रवैये के चलते मुस्लिम महिलाएं नाखुश हैं.

पिछले कुछ सालों में बीजेपी का ग्राफ बढ़ा

बीजेपी उम्मीदवार खातून घर-घर जाकर तीन तलाक के मुद्दे पर महिलाओं का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रही हैं. बीते कुछ सालों में जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी का ग्राफ बढ़ा है. जबकि 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस और माकपा के वोटों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है.

ये हैं मुख्य मुद्दे

79 फीसदी साक्षरता दर वाले जंगीपुर क्षेत्र में खेती ही लोगों की रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है. इसके अलावा बीड़ी, चावल, आम, जूट जैसी वस्तुओं का कारोबार भी बड़े स्तर पर होता है. लगातार चार बार कांग्रेस का सांसद होने के बावजूद न तो इलाके का पिछड़ापन दूर हुआ और न ही बीड़ी मजूदरों की समस्याओं का समाधान.

11सालों में विकास कार्य नहीं हुआ

बारिश में जंगीपुर के लोगों को बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ता है. बीते 11 सालों में न तो जंगीपुर की सड़कें दुरुस्त हो सकीं और न ही रोजगार को बढ़ावा मिला. यही वजह है कि इस दफा वोटरों ने भी अपनी समस्याओं को ही चुनावी मुद्दा बनाया है.

जंगीपुर सीट पर कब कौन जीता
1967 मो. लुत्फल हक (कांग्रेस)

1971 मो. लुत्फल हक (कांग्रेस)
1977 शशांक शेखर (माकपा)

1980 जैनल अबेदीन (माकपा)
1984 जैनल अबेदीन (माकपा)

1989 जैनल अबेदीन (माकपा)
1991 जैनल अबेदीन (माकपा)

1996 मो. इदरीश अली (कांग्रेस)
1998 अबुल हसनत खान (माकपा)

1999 अबुल हसनत खान (माकपा)
2004 प्रणब मुखर्जी (कांग्रेस)

2009 प्रणब मुखर्जी (कांग्रेस)
2012 (उपचुनाव) अभिजीत मुखर्जी (कांग्रेस)

2014 अभिजीत मुखर्जी (कांग्रेस)
हिन्दुस्थान समाचार/ओमप्रकाश

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