ज्यादा जीना हैं तो सुधारें आबोहवा
  • अगर भारत की हवा वर्ल्ड हेल्थ और्गनाइजेशन के स्तर की साफ हो जाए तो भारतियों की उम्र में एक साल का इजाफा हो जाएगा
  • हवा में घुलनशील प्रदूषणकारी तत्व पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ रही है. इससे सेहत पर असर बढ़ रहा है

प्रदूषित हवा में लगातार सांस लेने से और ऐसे माहौल में रहने से इंसान की उम्र ढाई साल तक कम हो सकती है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है.

इस रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि अगर भारत की हवा वर्ल्ड हेल्थ और्गनाइजेशन के स्तर की साफ हो जाए तो भारतियों की उम्र में एक साल का इजाफा हो जाएगा.

बुधवार को हेल्थ इफैक्ट इंस्टीट्यूट और हेल्थ मैट्रिक्स एंड एवोल्युशन बोस्टन की ओर से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई. इस रिपोर्ट में कहा गया कि उम्र पर प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है. इस रिपोर्ट में प्रदूषण के उम्र पर पड़ने वाले अच्छे और बुरे प्रभावों से संबंधित स्टडी की गई है.

इस रिपोर्ट की मानें तो भारत व एशिया महाद्वीप के देशों में हवा का स्तर गिर रहा है. यहां हवा में घुलनशील प्रदूषणकारी तत्व पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ रही है. इससे सेहत पर असर बढ़ रहा है.

वैसे डब्ल्यूएचओ के मानकों पर गौर करें तो पीएम 2.5 की मात्रा प्रति क्यूबिक मीटर 10 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि भारत में भी इस स्तर पर कुछ ही शहर आते हैं. अधिकतर शहर इस स्तर को क्रॅास कर चुके हैं. इस कारण कई हिस्सों में ये समस्या काफी बढ़ चुकी है.

बढ़ सकती है आयु

यह भी माना जाता है कि अगर हवा में पीएम 2.5 की मात्रा नियंत्रण में रहें तो इसका भी सेहत पर असर होता है. पीएम 2.5 की मात्रा नियंत्रण में रहने पर लोगों की एवरेज आयु एक साल तक बढ़ सकती है.

एशियाई देशों में भारत, पाकिस्तान नाइजीरिया जैसे देश शामिल हैं. इन देशों के लोगों की सेहत पर प्रदूषण का सबसे अधिक असर होता है. प्रदूषण का प्रभाव सीधे उम्र पर पड़ता है.

वहीं अगर बांग्लादेश की बात की जाए तो यहां पीएम 2.5 की मात्रा कंट्रोल में रहने की स्थिति में लोगों की आयु 1.3 साल और बढ़ जाएगी. इसी दिशा में अगर पूरी दुनिया की बात की जाए तो दुनिया की औसत आयु सात महीने तक बढ़ जाएगी.

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