दवाओं का कच्‍चा माल भी हुआ महंगा, लेकिन नहीं बढ़े दवा के दाम: आईडीएम

चीन में कोरोना वायरस के कहर का चीन के अलावा भारत सहित दुनिया के कई अन्‍य देशों की अर्थव्‍यवस्‍था पर विपरीत असर भली ही पड़ रहा है. कारोना वायरस की वजह से दवा मैन्‍यूफैक्‍चरिंग में इस्‍तेमाल होने वाले चीन से आयतित जरूरी फॉर्म्युलेशन अचानक से ठप पड़ गया है. 

इससे फार्मा इंडस्ट्री की लागत बढ़ गई है लेकिन, इसके बावजूद देश में दवाओं के दाम नहीं बढ़े हैं. यह बात इंडियन ड्रग्‍स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने कही है. 

भारत में चीन से सप्‍लाई चेन ब्रेक करने को लेकर घर-घर में इस्तेमाल होने वाली दवा पैरासिटामॉल की कीमतों में 70 फीसदी तक इजाफा को लेकर मीडिया में चल रही खबरों की पुष्टि को लेकर हिन्‍दुस्‍थान समाचार ने इंडियन ड्रग्‍स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (IDM) के राष्‍ट्रीय महासचिव दारा बी पटेल से विस्तृत बातचीत की. 

पटेल ने मंगलवार को संवाददाता से बातचीत के दौरान कहा कि कुछ दवाओं के दाम बढ़ने की खबर मीडिया में भले ही चल रही है. लेकिन, आईडीएम इसकी पुष्टि नहीं करता है. क्‍योंकि, दवाओं में इस्‍तेमाल होने वाला चीन से आयातित कच्‍चा माल भले ही कोरोना वायरस की कहर से महंगा हो गया है, लेकिन भारत में किसी भी दवा के दाम नहीं बढ़े है. 

बता दें कि मीडिया में एक एजेंसी के हवाले से खबर चल रही है कि देश में पैरासीटामॉल सहित कई दवाओं के दाम 40 से लेकर 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं. वहीं दवा बाजार को नजदीक से जानने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार को दवाईयों के आपूर्ति करने वाले मैन्यूफैक्चरर बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं. उनकी माने तो इससे जो पिछले टेंडर हैं उसके अनुरूप दवा की आपूर्ति करना मैन्यूफैक्चरर के लिए बहुत महंगा सौदा होता जा रहा है.

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत को मेक इन इंडिया पर जोर देना चाहिए. और दवाइयों का कच्चा माल भारत में ही तैयार किया जा सके, इस दिशा में भारत सरकार को युद्ध स्तर पर काम करना चाहिए.

हिन्‍दुस्‍थान समाचार/प्रजेश

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