M.S Dhoni
ICC declares Dhoni's decision, without special gloves, wicketkeeping
  • आईसीसी चाहता है कि धोनी दोबारा इन ग्लव्स को पहन के विकेटकीपिंग न करे
  • आईसीसी की जनरल मैनेजर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कहा यह नियमों के ख़िलाफ़ है और इसलिए हमने इस बैज को हटाने के लिए अनुरोध किया है

खेल डेस्क. क्रिकेट विश्व कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारतीय विकेटकीपर धोनी के ग्लव्स ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खिया बटोरी. धोनी के इन ग्लव्स पर इंडियन पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ का सिम्बल यानि ‘बलिदान बैज बना था.

लेकिन आईसीसी चाहता है कि धोनी दोबारा इन ग्लव्स को पहन के विकेटकीपिंग न करे. आईसीसी ने गुरुवार को इस बारे में बीसीसीआई से आग्रह किया है कि वह धोनी के ग्लव्स पर लगा हुआ बैज हटवा दे.

आईसीसी की जनरल मैनेजर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कहा यह नियमों के ख़िलाफ़ है और इसलिए हमने इस बैज को हटाने के लिए अनुरोध किया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या इस नियम के उल्लंघन पर कोई सज़ा भी हो सकती है?

तब क्लेयर ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम पहले उल्लंघन के लिए बात नहीं कर रहे है. फिलहाल सिर्फ उसे हटाने का निवेदन किया गया है. धोनी का भारतीय सेना के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है.

इसलिए धोनी ने विश्व कप में सेना के प्रति खास सम्मान देने के लिए अपने ग्लव्स पर इस बैज को लगाया है. पहले मैच में धोनी के ग्ल्वस पर इस खास बैज को देखकर प्रशंसकों ने उनकी खूब तारीफ की.

धोनी को साल 2011 में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ़्टिनेंट कर्नल रैंक से नवाजा गया है. वहीं साल 2015 में उन्होंने पैरा ब्रिगेड के तहत ट्रेनिंग भी की थी. बलिदान ब्रिगेड’ बैज पैरामिलिट्री कमांडो के लिए बेहद मायने रखता है.

जानिए क्यों हो रही है धोनी के गलव्स की चर्चा

धोनी जिस ने अपने विकेटकीपिंग करते हुए गल्वस पर जिस बैज का इस्तेमाल किया है उसे हर कोई इस्तेमाल में नहीं कर सकता. यह खास बैज पैरा-कमांडो लगाते हैं. इस बैज को ‘बलिदान बैज‘ के नाम से जाना जाता है.

पैराशूट रेजिमेंट के पास उनके अलग बैज होते हैं, जिन्हें बलिदान के रूप में जाना जाता है. इस बैज में ‘बलिदान’ शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है. यह बैज केवल पैरा-कमांडो ही पहन सकते है.

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