Dilli Chalo at Bhopal
Dilli Chalo A Bhopal
  • यह शहर अचानक सुर्ख़ियों मे तब आया जब 1984 में अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से लगभग बीस हजार लोगों की मौत हो गई थी
  • देश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल भोपाल सीट से ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा भी लोकसभा पहुंच चुके हैं

देश की सबसे साफ राजधानी का तमगा हासिल किए भोपाल को झीलों की नगरी भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ कई छोटे-बडे ताल हैं. साम्प्रदायिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब को संजोए भोपाल में इस बार बीजेपी और कांग्रेस की बीच में कांटे की टक्कर है. दिल्ली चलो में HS News ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का मूड जानने की कोशिश की है.

गैस कांड का दर्द आज भी जिंदा

यह शहर अचानक सुर्ख़ियों मे तब आया जब 1984 में अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से लगभग बीस हजार लोगों की मौत हो गई थी… इस हादसे को भले ही तीन दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका हो लेकिन उसका दर्द आज भी जिंदा है.

इस हादसे में किसी का भाई मरा तो किसी का बाप, किसी ने बेटा खोया तो किसी ने अपने पति को, इतना ही नहीं लोगों की आने वाली संतानों को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ा. दशकों तक प्रभावित इलाके में बच्चे दिव्यांग या शारीरिक कमजोर पैदा हुए. इस हादसे के शिकार हुए लोग आज भी उस दिन को याद करके अपने आंसुओं को रोक नहीं पाते हैं.  

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा हार गए

हमेशा से ही देश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल भोपाल सीट से ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा भी लोकसभा पहुंच चुके हैं. 1971 और 1980 के चुनाव में वे इस सीट से सांसद चुने गए थे. हालांकि 1977 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

बीजेपी का अभेद गढ़

मौजूदा वक्त में यहां बीजेपी का कब्जा है और ये सीट बीजेपी के अभेद्य गढ़ में से एक बन चुकी है… वर्तमान समय में बीजेपी के आलोक संजर यहां से सांसद हैं… 2014 के चुनाव की बात करें तो मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से फिलहाल कांग्रेस के पास महज 3 सीट ही है… लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों में जीत का परचम लहराने के बाद कांग्रेस ने कई लोकसभा सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है…

दिग्विजय और साध्वी प्रज्ञा में मुकाबला

इस बार कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को टिकट दिया है तो वहीं बीजेपी ने इस बार साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.

भोपाल के चुनाव में ध्रुवीकरण की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. कांग्रेस की हर संभव कोशिश है कि ध्रुवीकरण को किसी तरह रोका जाए. दिग्विजय सिंह खुद धार्मिक स्थलों पर जाकर अपनी छवि बनाने में लगे हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी दिग्विजय सिंह को मुस्लिम परस्त और हिंदू विरोधी बताने में लग गई है.

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