प्रभाष जी कहते थे खबरों पर विचारों को नहीं थोपना चाहिए: निशंक

नई दिल्ली, 14 जुलाई. देश के नामचीन पत्रकारों में से एक स्व: प्रभाष जोशी की स्मृति में आज 10वें स्मारक व्याख्यान का आयोजन राजघाट स्थित गांधी स्मृति दर्शन समिति के सत्यागृह मंडप में किया गया.

इस कार्यक्रम का आयोजन प्रभाष परंपरा न्यास के मुख्य न्यासी पद्मत्री रामबहादुर राय व गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक दीपंकर श्रीज्ञान के सौजन्य से न्यास एवं समिति के अन्य सदस्यों द्वारा किया गया.

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रभाष परंपरा न्यास के मुख्य न्यासी व हिन्दुस्थान समाचार के समूह संपादक पद्मश्री राम बहादुर राय ने अपने संबोधन में प्रभाष जी से जुड़ी हुई तमाम यादें ताजा की. उन्होंने बताया कि जोशी जी हिन्दी के अकेले ऐसे संपादक थे, जिन्हें अंग्रेजी के किसी अखबार की देखरेख करने का मौका मिला.

उन्होंने बताया कि उनके संपादन में पहले वर्ष में जनसत्ता का सर्कुलेशन 2 लाख 32 हजार से ज्यादा रहा. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक रहे.

विशिष्ट अतिथि जदयू के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी व मुख्य वक्ता गिरिराज किशोर रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभाष परंपरा न्यास के अध्यक्ष बनवारी ने की.

मुख्य वक्ता गिरिराज किशोर ने अपने व्याख्यान के विषय ‘बा और बापू’ पर बोलते हुए कहा कि बा और बापू एक ही समय में पैदा हुए. ये संयोग था.

साथ ही उन्होंने बताया कि इसी तरह यशोधरा और गौतम बुद्ध भी एक ही दिन पैदा हुए थे. उन्होंने गांधी जी से जुड़े हुए कई प्रसंगों की चर्चा अपने व्याख्यान में की. इसके साथ ही उन्होंने प्रभाष जी के बारे में बताया कि वह कहते थे खुलकर लिखना चाहिए.

किशोर ने आगे कहा कि प्रभाष जी के समय में पत्रकारों को जितना लिखने की आजादी थी उतनी अब नहीं है. रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रभाष जी को याद करते हुए कहा कि वह कहते थे कि खबरों को विचारों पर और विचारों को खबरों पर नहीं थोपना चाहिए.

खबर में निष्पक्षता और विचार में स्वतंत्रता होनी चाहिए. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केसी त्यागी प्रभाष जोशी को याद करते हुए कहा कि अगर आज वह होते तो विश्वकप सेमीफाइनल में भारत के बाहर होने से बहुत नाराज होते और इस पर बहुत बड़ा लेख लिखते.

साथ ही वह भारतीय टीम प्रबंधन से लेकर धोनी तक को अपनी लेखनी के माध्यम से आईना दिखाते. त्यागी ने गांधी जी के बारे में कहा कि मैंने नोबेल पुरस्कार प्रदान करने वाली समिति से गांधी जी को नोबेल पुरस्कार न देने के बारे में यह सुना कि महात्मा गांधी और ईसा मसीह का व्यक्तित्व इस युग से बड़ा है.

इसलिए ये पुरस्कार उनके सामने छोटा है. वहीं त्यागी ने कहा कि एक अच्छा पाठक होने के नाते मैंने सुभाष चंद्र बोस की लिखी हुई किताब में पड़ा कि ‘मेरी तुलना गांधी जी से नहीं की जा सकती, क्योंकि जब वह खड़े होते हैं तो महात्मा बुद्ध की तरह दिखते हैं और जब लेटते हैं तो ईसा मसीह की तरह दिखते हैं.’

कार्यक्रम के अध्यक्ष बनवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभाष जोशी और महात्मा गांधी जीवन से जुड़े हुए अनेक प्रसंगों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि गांधी यह वर्ष गांधी जी की 150वां जयंती वर्ष है. प्रभाष जोशी के करीबी रहे वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र ने कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों का आभार जताया.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से गोविंदाचार्य, वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंदन मिश्र, विजय त्रिवेदी, जितेंद्र तिवारी, दधिबल यादव, प्रभात ओझा, अवधेश कुमार, राहुल देव, संजय देव, हेमंत शर्मा, रजनी नागपाल, सुप्रिया आलोक तोमर, राकेश सिंह, श्रुति तरुन पचौरी, तरुन पचौरी सहित तमाम हस्तियां मौजूद रहीं.

कार्यक्रम का संचानल वरिष्ठ पत्रकार सुरेश तिवारी ने किया. कार्यक्रम के अंत में हिंदी के वरिष्ठ समालोचक नामवर सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया. भजन गायक खुशाल शर्मा के द्वारा कार्यक्रम की समाप्ति पर भजन प्रस्तुत किया गया.

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