IPS MUKESH GUPTA
IPS MUKESH GUPTA

शैलेन्द्र पाण्डेय

आसन्न लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस आक्रामक कार्यशैली के जरिये चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में है. भ्रष्टाचार को बेनकाब करने की गरज से सरकार ताबड़तोड़ एक के बाद एक चिन्हित अधिकारियों पर एसआईटी जांच करवाने पर आमादा है.

इससे नौकरशाही में डर सा समा गया है. भाजपा इस तरह के पैतरों इस धार को भोथरा करने में लगी हुई है. झीरमकांड, अंतागढ़ टेपकांड, छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) ई- टेडरिंग घोटाला, जनसंपर्क विभाग समेत दीगर मामले के पेंच फंसते दिखाई दे रहे हैं.

कांग्रेस के सत्तासीन होने के दो महीने के भीतर आनन- फानन जांच टीम का औचित्य समझा जा सकता है. बहुचर्चित  अरबों के घोटाले में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के जांच अधिकारी पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक (ए.सी.बी.) मुकेश गुप्ता और पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह को निलंबित कर दिया गया है.

राज्य बनने के बाद पुलिस सेवा के अफसरों पर यह अब तक की सबसे बड़ी कारवाई मानी जा रही है. यद्यपि यह प्रकरण उच्च न्यायालय में लंबित है. 

आर्थिक अपराध ब्यूरो (ई.ओ.डब्लू) ने उक्त अफसरों के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से फोन टेपिंग, फर्जी दस्तावेज बनाने, ब्लैकमेल कर धमकाने, साक्ष्यों से छेड़-छाड़ तथा अन्य मामलो में 15 धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है.

गृह विभाग ने ई.ओ.डब्लू. में शिकायत का हवाला देते हुए अखिल भारतीय सेवा आचरण अधनियम 1968 के क्रमांक 3 का उल्लंघन पाया है. जिसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई को संस्थित करना प्रक्रियाधीन माना गया.

इस संदर्भ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि जिन्होंने कूट रचा और छेड़छाड़ की है. उनके खिलाफ कार्रवाई आगे भी होगी. यह बहुत ही गंभीर और निजता के हनन का मामला है. 

दूसरी ओर पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता ने कहा कि पहली बार फोन टैपिंग मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव गृह एवं विधि सचिव की कमेटी ने इसे हर दो माह में जांचने के बाद इसे सही पाया है.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 1631 मार्च के अंक में…