पवित्र सावन- कैसे शुरू हुई कांवड़ यात्रा, सावन में क्या करें क्या ना करें..

सावन में शिव के दर्शन करने के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. सावन का महीना आते ही शिवभक्त उनके दर्शन के लिए अपने- अपने घरों से निकल पड़ते हैं. ये महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है.

कावंड़ यात्रा

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. इस महीने में शिव मंदिरों में भक्तों की काफी संख्या में भीड़ होती है. सावन में कई शुभ संयोग बन रहे हैं. 125 सालों बाद सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सावन की शुभ शुरूआत हो रही है. इस दिन वज्र- विष कुंभ योग का संयोग पड़ रहा है. एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पड़ रही है. इस दिन पंच महायोग का संयोग पड़ रहा है.

मुराद होती है पूरी-

सावन महीने के चारों सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस महीने में जो शिव भक्त पूरे मनोयोग से उनकी पूजा-अर्चना करता है उसकी मुराद भगवान शिव और पार्वती अवश्य पूरी करते हैं. उत्तर भारत में खासकर सावन के महीने में भक्तों का उल्लास देखते ही बनता है. सड़क से लेकर मंदिर तक हर ओर भगवान शिव के भक्त ही नजर आते हैं.

कावड़ यात्रा कब से शुरू हुई-

कहा जाता है कि त्रेतायुग में श्रवण कुमार ने पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू की थी. माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराने के लिए श्रवण हिमाचल के ऊना से हरिद्वार की यात्रा पर निकले थे. कहा जाता है कि श्रवण के माता- पिता ने हरिद्वार में गंगा स्नान की इच्छा प्रकट की थी. जिसके बाद श्रवण कुमार उनको अपने कंधे पर बैठा कर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार लाए थे. जब उन्होने अपने मां-बाप को गंगा दर्शन करा दिए और स्नान करने के पश्चात अपने साथ गंगा जल भी ले गए थे. तब से ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई.

कैसे करें शिव की पूजा-

  • सावन के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है.
  • शिवभक्त बोल बम का जयकारा लगाते हुए बाबा विश्वनाथ को जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते हैं. बाबा को पवित्र गंगा जल चढ़ाया जाता है जिससे वो प्रसन्न होते हैं.
  • मान्यता है बाबा को बेलपत्र और दुग्धाभिषेक, धतूरा चढ़ाने से शिव की कृपा बरसती है. विशेष रुप से सोमवार को शिव की पूजा- अर्चना अवश्य करनी चाहिए.
  • सावन को सुबह शुभ मुहुर्त में उठकर नित्य कर्मों के बाद स्नान ध्यान करके शिव के मंदिर में जाना चाहिए. संभव हो सके तो प्रत्येक सोमवार को व्रत का संकल्प लेना चाहिए. दिन में फलाहार किया जा सकता है. साथ ही दुग्धपान करना लाभप्रद है. सावन माह में लाल या भगवा गमछा या वस्त्र अवश्य पहनें .
श्रवण कुमार

किन मंत्रों का करें पाठ-

  • प्रथम मंत्र ॐ नम: शिवाय का जाप करना चाहिए.
  • सावन में खासकर महा- मृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ का जप करना चाहिए.
  • अगर संभव हो तो बोल बन के जाप के साथ हर- हर महादेव और ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ मंत्र का जप अवश्य करें. इससे शिव प्रसन्न होते हैं. इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करें.

सावन में क्या ना करें-

  • सावन में ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिए. मांस- मदिरा का सेवन नही करना चाहिए. भूलकर भी किसी अपवित्र स्थान पर नही चाहिए.
  • सावन में काले वस्त्र ना पहने तो सबसे अच्छा है. सावन में बैंगनी रंग या नीले कपड़े को ना पहने.
  • सावन महीने में अगर संभव हो तो बैंगन और गन्ने का जूस और काली मिर्च खाने से बचें.
  • पूरे सावन तेल ना लगाएं और शरीर के बाल ना बनाएं. दाढ़ी, नाखून ना काटवाएं.
  • कांसे के और पीतल के बर्तन में संभव हो तो पानी पिएं और ज्यादा से ज्यादा कद्दू सीताफल और कन्दमूल फल खाएं.
  • शिवलिंग पर हल्दी का लेप ना लगाएं , ना जल या दूध में मिलाकर चढ़ाएं.
  • सावन में भूल कर भी दिन में ना सोएं.
  • सांड को कदापि ना मारे, संभव हो तो उसे कुछ खाने को दें.
  • कांवरयात्रा पर निकले शिवभक्तों का अपमानित ना करें. उनकी सेवा करें और उनकी यात्रा में हरसंभव मदद करें.
  • अगर आप कांवड़यात्रा पर हैं तो सभी से प्यार से भोले कहें और गुस्सा कदापि ना करें. जितनी बार आप भगवान भोलेनाथ का नाम लेगें उतना ही ज्यादा भगवान आपसे खुश होगें.

मधुकर वाजपेयी / Madhukar Vajpayee

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