लोक में हनुमान

  • इतिहास में जितना पीछे जाएंगे, वहां हनुमान का अनूठा रूप हमें मिलता जाएगा. वे महज हनुमान नहीं हैं, बल्कि अपार शक्ति के प्रतीक हैं
  • हनुमान से संबंधित 6000 लोक और जनजातीय कलाएं सहेज कर रखी गई हैं. यह संग्रहालय उनके घर में स्थित है

शालू शुक्ला

हनुमान भारतीय परंपरा में महज देवता नहीं हैं. वे आस्था के केंद्र हैं. सनातनी परंपरा वाला कोई घर हो और वहां हनुमान न मिलें! यह तो असंभव बात होगी. 

हम इतिहास में जितना पीछे जाएंगे, वहां हनुमान का अनूठा रूप हमें मिलता जाएगा. वे महज हनुमान नहीं हैं, बल्कि अपार शक्ति के प्रतीक हैं. हनुमान के विविध रूप बीते दिसंबर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में दिखाई दिए. 

हनुमान की पहचान लाल रंग से जुड़ी है. लेकिन इसका यह दावा करना हमारी अज्ञानता है. सच बात तो यह है कि वे हरे रंग में हैं. पीले रंग में भी हैं. कला केंद्र में एक ऐसी पुरानी पेंटिंग प्रदर्शित थी, जिसमें हनुमान हरे रंग में दिखाई देते हैं. 

इसके पीछे का तर्क है कि हनुमान वनजीवी हैं. वे प्रकृति की गोद में जीवन जीते हैं. इसलिए दक्षिण भारत और हिमाचल के कई क्षेत्रों में हनुमान की पेंटिंग्स हरे रंग में बनाई जाती रही है. 

जबकि बंगाल के कुछ हिस्सों में वे पीले रंग में दिखाई देते हैं. देश के जनजातीय समाज में हनुमान के प्रति गहरी आस्था रही है. इसके ढेरों अवशेष जगह-जगह बिखरे हुए हैं. 

उसे सहेज कर इस प्रदर्शनी में सुंदर तरीके से रखा गया है. इस संग्रह को देखकर जनजातीय समाज की परंपरा को बखूबी समझा जा सकता है. राजधानी दिल्ली स्थित आईजीएनसीए परिसर केंद्र में हनुमान के विविध रूप प्रदर्शित थे. 

इस विविधता को देखकर भारतीय संस्कृति की व्यापकता का अनुमान लगाना कठिन हो जाता है. यह अपने तरह की पहली प्रदर्शनी थी, जहां हनुमान से जुड़ी 600 लोक और आदिवासी कलाकृतियां मौजूद रहीं. 

एक समय इसका संकलन केसी. आर्यन ने किया था. वे 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कलाकार थे. उन्होंने हनुमान के विविध रूपों का संकलन कर 1984 में ‘होम ऑफ फोक आर्ट: लोककला और आदिवासी कला संग्रहालय’ का गठन किया. 

जहां हनुमान से संबंधित 6000 लोक और जनजातीय कलाएं सहेज कर रखी गई हैं. यह संग्रहालय उनके घर में स्थित है.  हनुमान के इसी संग्रह को पहली बार उनके परिवार के लोग आईजीएनसीए की मदद से देहरी से बाहर लेकर आए. 

कला केंद्र की दीर्घा में उसे प्रदर्शित किया. यहां लोग हनुमान के विविध रूपों को देखकर चकित हुए. वे आश्चर्य कर रहे थे कि हरे रंग से भी हनुमान की पेंटिंग्स बनाई जाती रही है. 

राजधानी के लोगों को नया अनुभव मिला. वे लाल रंग वाले हनुमान को देखते और उनकी पूजा करते आ रहे हैं. लेकिन अब उनकी धारणा को बदलने वाली तस्वीरें सामने टंगी थीं. 

पूरा लेख पढ़ें नवोत्थान के जनवरी के अंक में…

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