वाराणसी के इतिहास और पर्यटक स्थलों के बारे में जानें ये रोचक बातें….

नई दिल्ली: भारत के सबसे प्राचीनतम शहरों में से गंगा तट पर बसा है एक शहर. इसे बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है. हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है वाराणसी. इसे मंदिरों का शहर’, ‘भारत की धार्मिक राजधानी’, ‘भगवान शिव की नगरी’ भी कहा जाता है. मान्यता है कि वाराणसी शिव के त्रिशूल पर टिकी है. महाकाव्यों से भी इस शहर का इतिहास जुड़ा है.

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस शहर की अहम् भूमिका रही. यहां के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने चंद्रशेखर आजाद जैसै स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया. लगभग 84 घाट होने के चलते इसे घाटों का शहर भी कहा जाता है.

काशी की संस्कृति का गंगा नदी और इसके धार्मिक महत्व से अटूट रिश्ता है. यहां के दश्शावमेध घाट की गंगा आरती वर्ल्ड फेमस है. जिसे देखने विदेशी सैलानी आते हैं. इस भव्य आरती की शुरुआत 1991 में हुई थी. ये आरती हर किसी का मन मोह लेती है.

हर शाम यहां आरती होती है. आरती के समय नदी में नीचे की ओर बहता पानी पूरी तरह रोशनी में नहाया होता है. इस घाट को बाजीराव पेशवा ने बनवाया था. ये घाट पंचतीर्थों में से एक है.

अस्सी घाट- ये घाट दक्षिण की ओर स्थित अंतिम घाट है जहां कई मंदिर और अखाड़े मौजूद हैं. इस घाट पर स्नान करनेवाले श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है. सूर्यास्त के बाद इस घाट पर पंडितों द्वारा मंत्रों और घंट-घड़ियालों की गूंज के साथ गंगा आरती का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.

अपना रोचक इतिहास लिए हुए प्रसिद्ध है मणिकर्णिका घाट, ये वाराणसी का सबसे पुराना घाट है, इस घाट के साथ कई पौराणिक कथाएं जुडी हुई है. एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने अपनी पत्‍नी पार्वती को अकेला छोड़कर यहां काफी समय बिताया था. इसे सबसे पुराना शमशान भी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां 5000 साल से चिताएं जलती रहती हैं.

जिस घाट का नाम एक शाही परिवार के नाम पर रखा गया वो है दरभंगा घाट- ये वाराणसी के दशाश्‍वमेध घाट और राणा महल घाट के बीच में स्थित है. इस घाट का नाम दरभंगा शाही परिवार के नाम पर रखा गया था.

जिसे भगवान राम ने स्‍वंय अपने वफादार भक्‍त हनुमान के लिए बनाया था ये हनुमान घाट- जिसके चलते इसे पहले रामेश्वरम घाट के नाम से भी जाना जाता था. ये घाट जूना अखाड़ा के पास स्थित है, जो वाराणसी का एक प्रसिद्ध धार्मिक संप्रदाय है.

जहां पांच नदियों गंगा, सरस्‍वती, धुपापापा, यमुना और किरना का मिलन होता है उसे कहते हैं पंचगंगा घाट. इन पांच नदियों में से केवल गंगा को देखा जा सकता है, बाकी की चार नदियां पृथ्‍वी में समा गई.

अब बात अगर मान मंदिर घाट की करें तो इसे 1585 में आमेर के राजा सवाई राजा मान सिंह ने बनवाया था. जिसके चलते इसका नाम मान मंदिर घाट पड़ गया. इसे पहले सोमेश्‍वर घाट के नाम से जाना जाता था.

पिछले कई हजार सालों से वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इस मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है. मान्यता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

जैन धर्म के तैईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्‍वनाथ को समर्पित जैन मंदिर. जो बीएचयू यानी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

वाराणसी में एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्‍वविद्यालय है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जिसे बीएचयू के नाम से भा जाना जाता है. इसे पूरब का ऑक्‍सफोर्ड कहा जाता है. ये विश्वविद्यालय 1300 से ज्यादा एकड़ में फैला हुआ है. यहां पूरी दुनिया से लगभग 34 देशों के छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं.

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है बनारस घराना . इसे गायन और वादन दोनों कलाओं के लिए जाना जाता है. बनारस घराने के नाम पर मशहूर डांसगुरु सितारा देवी के बाद उनकी बेटी कथक क्वीन जयंतीमाला ने इसके वैभव और छवि को बरकरार रखा है.

बनारस की तंग गलियों में मानो हवा भी थोड़ा संभलकर घुसती होगी. गलियों में बनी हजारों अट्टालिकाएं आकर्षण का केंद्र हैं. अपना किस्सा, अपना इतिहास और अपना अलग अंदाज लिए ये गलियां खुलती भी हैं और भुलभुलैया सी नचाती भी हैं. पुराने काशी में ठग इन भुलभुलैया वाली गलियों का बड़ा फायदा उठाते थे.

वाराणसी बनारसी साडियों के लिए भी का फी फेमस है. यहां मशीन और हस्तशिल्प से बनी हर तरह की साड़ियां मिलती हैं. शादी या किसी खास मौके पर हर औरत कुछ अलग लगना चाहती है ऐसे में बनारसी साड़ी उसकी सुंदरता को और निखारती है. बनारसी साड़ी हर उम्र की महिला का बेहद अच्छी लगती है. यहां अलग-अलग कीमत पर सुंदर साड़ियां मिल जाएंगी.

वाराणसी की चाय पर चर्चा पर भी काफी फेमस है. यहां का हर आदमी देश की राजनीति से लेकर अंर्तराष्ट्रीय मुद्दे तक पर चर्चा कर सकता है.

यहां की मिठाइयों से लेकर चाट-पकौड़ी तक बहुत फेमस है. जलेबी और कचौड़ी-सब्जी से आप यहां सुबह का नाश्ता कर सकते हैं. यहां का काशी चाट भंडार चाट के लिए मशहूर है. अरे भई खाने की बात की है तो यहां का पान कैसे भूल सकते हैं जो दुनियाभर में मशहूर है. इस पान को चबाना नहीं पड़ता ये धीरे-धीरे मुंह में घुलता है और इसे खाने के बाद मन भी खुश हो जाता है. 

यहां आपके रुकने के लिए कई होटल्स मौजूद हैं. होटल गैंग्स ग्रैंड, होटल एचकेजे पैलेस, गार्डन इन होटल, होटल श्रीराम इंटरनेशनल समेत कई धर्मशालाएं भी मौजूद हैं. होटल्स के लिए अच्छा रहेगा कि आप पहले से बुकिंग कर लें जिससे कि कोई परेशानी न हो.

अगर आप हवाई जहाज से वाराणसी जाने का प्लान कर रहे हैं तो देश के किसी भी शहर से वाराणसी के लिए फ्लाइट ले सकते हैं. यहां वाराणसी लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट है.अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन भारत के कई शहरों से रेल माध्यम जुड़ा हुआ है. आपको दिल्ली और आसपास के शहरों से बस भी आसानी से मिल जाएगी.

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