ऐतिहासिक टैक्स सुधार GST ने पूरे किए 2 साल,जानिए सरकार की सफलताएं और चुनौतियों के बारे में
  • जीएसटी को न लागू करने को लेकर देश में कई तरह के प्रर्दशन हुए
  • जीएसटी में कई खामियां थी.यहां तक की लोगों को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा था

नई दिल्ली.आज यानी की 1 जुलाई को दो साल पहले वस्तु एवं सेवा कर (गुड्स एंव सर्विस टैक्स) को देशभर में लागू किया गया था.इन दो सालों में जीएसटी का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.जीएसटी देश के लिए न सिर्फ एक ऐतिहसिक फैसला था.बल्कि ये देश के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव भी था.

जीएसटी को लागू करना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं था.क्योंकि कई ऐसे कारोबारी थे जिन्होंने जीएसटी को बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया था. तो वहीं कई ऐसे कारोबारी थे जिन्होंने इसका जमकर विरोध किया था. जीएसटी को न लागू करने को लेकर देश में कई तरह के प्रर्दशन हुए.इसे लागू करने के बाद भी कारोबरियों ने इसका जमकर विरोध किया. लेकिन सरकार अपने एक देश एक टैक्स पर अटल रही.

जीएसटी को सरकार ने लागू तो कर दिया था.लेकिन सरकार ये जानती थी कि इसमें कई खामियां हैं.जिसके कारण करोड़ों कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है. जीएसटी की सबसे बड़ी परेशानी थी इसका टैक्स स्लैब.जिसे सरकार ने धीरे-धीरे सुधारा.तो आईए जानते हैं जीएसटी में सरकार को मिली सफलता के बारे में.साथ ही उन चुनौतियों के बारे में भी जो सरकार के सामने हैं.

सरकार की सफलताएं-

जीएसटी में कई खामियां थी.यहां तक की लोगों को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा था. इन सबके बावजूद टैक्स कलेक्शन हर बार बढ़ता ही गया.अगस्त 2017 के 93,590 करोड़ रुपए के राजस्व के मुकाबले मई 2019 में राजस्व बढ़कर 1,00,29 करोड़ रुपए रहा है.
राज्योंकी सीमाओं में अबाध तरीके से ट्रकों की आवाजाही की वजह से ट्रांसपोर्ट में तेजी आई है.जिसकी वजह से लॉजिस्टिकग यानी की माल की ढुलाई की लगात में करीब 15 फीसदी की कमी देखने को मिली.

इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा लोगों ने आईटीआर का समर्थन किया. लोगों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों ने आईटीआर फॉर्म भरा.इसके अलावा विभिन्न मद में सिंगल टैक्स रेट होने से टैक्स देना आसान हुआ है.

सरकार के सामने हैं ये चुनौतियां-

जीएसटी काफी सफल रहा है.लेकिन इसमें अब भी कई चुनौतियां बनी हुई है.रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया अब तक काफी जटिल बनी हुई है.जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं.

सरकार के सामने दूसरी चुनौती ये है किं अभी भी लोगों को सर्विस प्रोवाइडर्स को कई जगह रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है.जो कि लोगों के लिए काफी परेशानी की बात है.

विवाद से निपटने में मुश्किल यह है कि अधिकार क्षेत्र केंद्र और राज्यों में बंटा हुआ है.निर्यातकों को रिफंड लेने के लिए काफू जूझना पड़ता है.बिजली,तेल,गैस,शराब अब भी जीएसटी से बाहर हैं.इन्हें जीएसटी में किस तरह से लाया जाएं यह एक चुनौती है.

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