45 साल पुरानी क्रीम, फेयर ऐंड लवली का बदला जा रहा है नाम, Hindustan Unilever ने किया ऐलान

fair
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on whatsapp
WhatsApp

नई दिल्ली. नस्ली मानसिकता के खिलाफ दुनिया भर में आंदोलन देखने को मिल रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई सारे ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं. #blacklivesmatter का मुद्दा ट्वीट पर कई दिनों कर ट्रेंड करता रहा था. जिसके बाद लोगों ने गोरो करने का दवा करने वाली कंपनियों और इनका प्रचार करने वाले सेलेब्रिटीज को जमकर ट्रोल किया गया.

इसी को देखते जॉनसन एड जॉनसन ने अपने फेयरनेस क्रीम को एशिया में न बेचने का फैसला किया गया था. जॉनसन एड जॉनसन बाद देश की दिग्गज कंपनी हिन्दुस्तान यूनीलीवर बड़ा फैसला लिया है. दरअसल कंपनी अपने 45 साल पुराने अपने ब्रांड फेयर एंड लवली का नाम बदलने जा रही है.

कंपनी की ओर से कहा गया है कि फेयर एंड लवली से फेयर शब्द को हटाने की बात चल रही है, नया ब्रांड नेम सभी की मंजूरी के बाद लॉन्च किया जाएगा. कंपनी जो नए नाम के साथ अपने प्रोडक्ट लॉन्च करेगी वो अलग-अलग स्किन टोन वाली महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा.

सन 1975 में, हिंदुस्तान यूनीलीवर ने फेयर एंड लवली नाम की एक गोरा करने वाली क्रीम लॉन्च की. देश में गोरेपन की क्रीम के बाजार का 50-70 फीसदी हिस्सा फेयर एंड लवली के पास ही है. फेयर एंड लवली ने साल 2016 में 2000 करोड़ क्लब में प्रवेश किया, जिससे पता चलता है कि भारत में गोरा करने वाली क्रीम खूब बिकती हैं.

यूनिलिवर कंपनी सिर्फ फेयर ऐंड लवली ब्रैंड से ही भारत में सालाना 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा का कारोबार करती है. दुनिया भर में अश्वेतों के प्रति भेदभाव रोकने की मुहिम के बीच गोरे रंग को बढ़ावा देने वाली क्रीम को लेकर भी सवाल उठ रहे थे.

सालों से खूबसूरती और गोरापन मामले में कंपनी के इस प्रोडक्ट का विरोध होता रहा है. कई महिला संगठनों ने विरोध में कहा था कि किसी महिला की खूबसूरती का आकलन उसके रंग से नहीं होना चाहिए. संगठनों का आरोप रहा है कि क्रीम में गोरापन शब्द को जिस तरह से इस्तेमाल किया जाता है उससे ये प्रतीत होता है कि सिर्फ गोरी महिलाएं ही खूबसूरत होती हैं.