गांव लौटे बाढ़-पीड़ितों को महामारी रोकने के टिप्स दे रहा है स्वास्थ्यकर्मी

मुंगेर, 06 अक्टूबर. गंगा नदी के जल-स्तर में लगातार गिरावट दर्ज होने और बाढ़-पीड़ितों के अपने-अपने गांवों में लौटने के बाद अब ग्रामीण जल-जमाव के कारण महामारी के खतरे से डरे हुए हैं.

जिला पदाधिकारी राजेश मीणा ने सिविल सर्जन को बाढ़ प्रभावित गांवों में बाढ़ पीड़ितों को बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है.

इस बीच, जिला प्रशासन और मुंगेर स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से संभावित महामारी को रोकने के लिए बाढ़ पीड़ितों को जागरूक करना शुरू कर दिया है.

स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित गांवों में ब्लिचिंग पाउडर के छिड़काव को तेज कर दिया है. स्वास्थ्यकर्मी गांव लौटे बाढ़ पीड़ितों को पानी शुद्ध करने की विधि बता रहे हैं और केवल शुद्ध पानी ही पीने की सलाह दे रहे हैं.

सिविल सर्जन डा0 पुरूषोत्तम कुमार ने आज बताया कि जिला स्वास्थ्य विभाग ने जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों के बीच अबतक डेढ़ लाख ‘हैलोजन’ टेबलेट निःशुल्क वितरित किया है.

बाढ़ पीड़ितों को एक लीटर पानी में एक हैलोजन टेबलेट डालकर पानी को आधा घंटा छोड़ देने और बाद में शुद्ध पानी को निथार कर पीने की सलाह ग्रामीणों को दे रहे हैं.

हैलोजन टेबलेट आधा घंटा में एक लीटर पानी को शुद्ध कर देता है. साथ ही, हाथों को अच्छी तरह धो कर ही भोजन पकाने और तैयार भोजन खाने की सलाह स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीणों को दे रहे हैं.

सिविल सर्जन ने आगे बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में ब्लीचिंग-पाउडर, गैमेक्सीन और चूना के मिश्रण को मिलाकर उनका छिड़काव किया जा रहा है.

सिविल सर्जन ने आगे बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में आज तक छः हजार बाढ़-पीड़ितों की चिकित्सा की है. हिन्दुस्थान समाचार/श्रीकृष्ण

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