दिल्ली हाईकोर्ट का दिल्ली सरकार को नोटिस, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस को लेकर मांगा जवाब

Delhi HC-Arvind Kejriwal
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उसने स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में दाखिले के लिए अलग से मानदंड निर्धारित किया है. जस्टिस जयंत नाथ की बेंच ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी.

यह याचिका 11वीं में दाखिला लेने वाले छात्र सुमित गुप्ता ने दायर की है. याचिकाकर्ता की ओर से वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के मानदंड मनमाने और भेदभावपूर्ण है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि अगर ये मानदंड कानून के मुताबिक खरे नहीं उतरते हैं तो याचिकाकर्ता छात्र को मुआवजा देना होगा.

याचिकाकर्ता छात्र ने त्रिलोकपुरी के एक स्कूल से दसवीं पास की है. आगे ही बेहतर शिक्षा के लिए उसने सायंस स्ट्रीम से पढ़ने के लिए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में दाखिले के लिए आवेदन किया. दिल्ली में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के पांच स्कूल हैं. छात्र को हिन्दी में 49 फीसदी अंक आए थे लेकिन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में दाखिले के लिए हिन्दी में 51 फीसदी अंक निर्धारित है.

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में सायंस में दाखिले के लिए गणित में 71 फीसदी, अंग्रेजी में 61 फीसदी, सोशल सायंस में 51 फीसदी, और हिन्दी में 51 फीसदी अंक निर्धारित हैं. छात्र को सायंस में 77 फीसदी, गणित में 87 फीसदी, अंग्रेजी में 87 फीसदी, सोशल सायंस में 57 फीसदी, और हिन्दी में 49 फीसदी अंक आए थे.

दूसरे सरकारी स्कूलों में 11वीं में दाखिले के लिए सायंस स्ट्रीम में कुल 55 फीसदी अंक निर्धारित हैं. जबकि अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में 50 फीसदी अंक चाहिए. याचिका में कहा गया है कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में दाखिले के लिए दिल्ली सरकार का नोटिफिकेशन संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन करता है. यह नोटिफिकेशन दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट एंड रुल्स का भी उल्लंघन करती है.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय