हेट स्पीच मामला: ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई टली.

Brinda Karat
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ हेट स्पीच को लेकर CPM नेता बृंदा करात (Brinda Karat) की FIR दर्ज करने के लिए दायर याचिका खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई टाल दी है.

जस्टिस योगेश खन्ना ने सभी पक्षकारों को इस मामले के संबंध में फैसलों की प्रति आज ही दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले पर अगली सुनवाई 2 नवम्बर को होगी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि यह क्षेत्राधिकार का मसला है.

सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने धारा 397 का हवाला दिया है, जिसका मतलब केस खारिज होना नहीं है. ये मामला महीनों तक लंबित रहा. तब जस्टिस खन्ना ने कहा कि आप जानते हैं कि मजिस्ट्रेट के समक्ष हजारों केस लंबित है. सिद्धार्थ अग्रवाल ने प्रभू चावला के केस का हवाला देते हुए कहा कि धारा 482 के तहत हाईकोर्ट के पास आंतरिक शक्ति है.

उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के विक्रम बख्शी बनाम दिल्ली राज्य के फैसले का उदाहरण दिया. अग्रवाल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने धारा 156(3) के तहत याचिका दायर की थी. ट्रायल कोर्ट ने केस की मेरिट पर गौर किए बिना हमें क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज कर दिया. ऐसा कर ट्रायल कोर्ट ने गलती की.

आरोपितों की ओर से वकील ऋचा कपूर ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जो सवाल उठाए हैं, वे सेशंस कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर कर भी कहे जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि वो इस मामले पर फैसलों की प्रति और याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर दलीलें रखेंगी. उसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को फैसलों की प्रति आज ही दाखिल करने का निर्देश दिया.

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले 26 अगस्त को वृंदा करात की याचिका खारिज कर दी थी. एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशाल पाहूजा ने कहा था कि इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से जरूरी अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है.

ट्रायल कोर्ट ने अनिल कुमार और अन्य बनाम एमके अयप्पा और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उदाहरण दिया था , जिसमें कहा गया था कि लोकसेवक के खिलाफ जांच का आदेश बिना पूर्व अनुमति के नहीं दिया जा सकता है. ट्रायल कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ वृंदा करात ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले 26 फरवरी को अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को क्लीन चिट दे दी थी. कोर्ट को सौंपे एक्शन टेकन रिपोर्ट में क्राइम ब्रांच ने कहा था कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है. सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर धीरज ने कोर्ट को बताया था कि वो इस मामले पर कानूनी सलाह ले रही है.

क्राइम ब्रांच ने कहा था कि बीजेपी नेताओं के बयान और हिंसा की घटनाओं में कोई संबंध नहीं है. सीपीएम की नेता वृंदा करात ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के हेट स्पीच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. बता दें कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर ने एक जनसभा में नारेबाजी करवाई थी.

उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को देश का गद्दार बताते हुए नारा लगवाया था कि ‘देश के गद्दारों को…गोली मारो…’ बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग की तुलना कश्मीर की स्थिति से की थी.

उन्होंने कहा था कि शाहीन बाग में जो लाखों लोग हैं, वो एक दिन आपके घर में घुस जाएंगे, मां-बहनों का रेप करेंगे और लूटेंगे.’ दोनों के बयानों पर निर्वाचन आयोग ने भी कार्रवाई की थी. पहले तो दोनों को बीजेपी के स्टार प्रचारकों की सूची से हटाने का आदेश दिया था. बाद में अनुराग ठाकुर पर 72 घंटे और प्रवेश वर्मा पर 96 घंटे तक चुनाव प्रचार पर रोक लगा दिया था.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय