हाथरस कांडः योगी सरकार ने SC को बताया कि आखिर क्यों रात में पीड़िता का अंतिम संस्कार हुआ?

Hathras Victim Cremated
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हाथरस गैंगरेप मामले में जिस तरह से पुलिस ने मृतका के शव का रात को ही अंतिम संस्कार कर दिया था. उसे लेकर पूरे देश में शासन और प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्ष इसे लेकर योगी सरकार पर हमलावर है. वहीं अब योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इसके पीछे का कारण बताया.

उत्तर प्रदेश सरकार ने आज (मंगलवार को) सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया. इस हलफनामे में सरकार ने मृतका के शव को रात में क्यों जलाया गया, इसका भी जवाब दिया है. योगी सरकार ने कहा कि उसे कानून व्यवस्था बिगड़ने की जानकारी मिली थी. सरकार ने अदालत को बताया कि जानकारी मिली थी कि इस मामले में कुछ लोग माहौल बिगाड़ने का काम करने वाले थे.

रात में ही शव जलाने के मुद्दे पर सरकार का कहना है कि उसे ऐसी खुफिया सूचना मिली थी कि अगर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए सुबह होने का इंतजार किया जाता तो बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती थी. इसी को ध्यान में रखते हुए पीड़ित परिवार को भरोसे में लेते हुए शव का रात को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था.

योगी सरकार ने अपने हलफनामे में कोरोना वायरस और बाबरी मस्जिद पर आए फैसले का भी जिक्र किया है. हलफनामे में सरकार ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और समाजिक संगठन लोगों को भड़काकर माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रहे थे. कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए और हिंसा से बचने के लिए रात को ही मृतका का अंतिम संस्कार कराना पड़ा.

सीबीआई जांच की सिफारिश की

यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच को इजाजत दे दी गई है. सरकार ने हलफनामे में कहा कि सीबीआई जांच का आदेश देने के बाद उन आरोपों पर विराम लग जाएगा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है.

यूपी सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई जांच की मानिटरिंग करनी चाहिए. उसने मामले में अब तक हुई जांच का विस्तृत ब्योरा सुप्रीम कोर्ट को सौंपकर दावा किया कि कुछ निहित स्वार्थ वाली ताकतें निष्पक्ष न्याय के रास्ते में रोड़ा अटका रही हैं.

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील संजीव मल्होत्रा ने कहा है कि पुलिस का यह बयान कि परिवार की इच्छा के मुताबिक शव का दाह-संस्कार किया गया है, झूठा है क्योंकि पुलिसकर्मियों ने खुद ही मृत शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया. यहां तक कि मीडियाकर्मियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया.

याचिका में इस मामले को उप्र से दिल्ली ट्रांसफर करने की भी मांग की गई है. याचिका में इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के एक वर्तमान या रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय