छह दशक में छह लाख गुणा बढ़ा सरकारी राजस्व, लेकिन व्यवस्था गंगा मैया के भरोसे

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बेगूसराय, 16 अप्रैल (हि.स.). मगध और मिथिला की सीमा कहे जाने वाले सिमरिया गंगाघाट से सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती है लेकिन श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधा के नाम पर व्यवस्था शून्य है. सिर्फ कार्तिक मेला के दौरान ही प्रशासनिक स्तर पर कुछ करने की कवायद दिखाई देती है. 

उसके बाद यहां आने वाले लाखों श्रद्धालु गंगा मैया के रहमोकरम पर ही वापस लौटते हैं. बीते करीब छह दशक में यहां की बंदोबस्ती की राशि में पांच लाख 80 हजार गुणा से अधिक की वृद्धि हो चुकी है. बावजूद इसके यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की सुविधा नहीं मिल पाती है.

सिमरिया में आजादी के सबसे पहले रेल सह सड़क पुल राजेन्द्र सेतु का निर्माण होने के बाद 1960 के दशक से लोगों ने जब सिमरिया घाट में गंगा स्नान करने के लिए भीड़ लगाना शुरू किया तो सरकार ने गंगा घाट की वार्षिक बंदोबस्ती शुरू कर दी और पहली बंदोबस्ती 51 रुपए में हुई थी जो इस वित्तीय वर्ष में करीब तीन करोड़ रुपए तक पहुंच गयी है, यानी कि छह दशक में यहां के सरकारी राजस्व में करीब छह लाख गुणा की वृद्धि हो गई. शुरू से ही इस गंगाघाट की बंदोबस्ती राशि में प्रत्येक तीन वर्ष पर 15 प्रतिशत की वृद्धि होती आई है.

1991-92 में सिमरिया घाट की बंदोबस्ती करीब चार लाख में हुई थी. इसके बाद 2009-10 में यह बढ़कर 15 लाख रुपए पर पहुंच गई.  2011 में सिमरिया गंगा धाम में मेला लगने के बाद से लगातार बंदोबस्ती की राशि में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई तथा 2019-20 में यह गंगाघाट दो करोड़ एक लाख 28 हजार रुपए में बिका.

18 प्रतिशत जीएसटी एवं दस प्रतिशत निबंधन शुल्क मिलाकर सरकार को करीब ढाई करोड़ रुपए मिले. एक साल बाद ही बंदोबस्ती राशि में करीब 50 लाख रुपए की वृद्धि हो गई और इस साल जीएसटी एवं निबंधन शुल्क मिलाकर सरकार को दो करोड़ 96 लाख रुपया मिलेगा. 

इतनी राशि  मिलने के बावजूद सरकार और सरकारी अमला गंगा घाट के विकास की बात करने के अलावा कुछ कर नहीं रहा है. प्राप्त राजस्व से 20 प्रतिशत भी अगर यहां ईमानदारी पूर्वक खर्च कर दिया जाए तो यह प्रयाग का संगम तट और हरिद्वार का हर की पैड़ी बन सकता है. सर्वमंगला सिद्धाश्रम के स्वामी चिदात्मन जी समेत अन्य लोग इसके लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह प्रयास भी सफलीभूत नहीं हो रहा है.

आसपास के आधे दर्जन जिलों समेत दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को छिनतई का शिकार होने के साथ-साथ गंगा किनारे फैली गंदगी और बदबू के बीच गंगा स्नान करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. यहां तो लाश का अंतिम संस्कार करने आए लोगों के साथ भी लूटपाट होती  रहती है जिसमें पीड़ित के स्थानीय रहने पर पुलिस को सूचना मिल जाती है, लेकिन दूसरी जगह से आने वाले लोग पुलिसिया लफड़ा में फंसने के बदले चुपचाप घर लौट जाने में भलाई समझते हैं.

जर्जर सड़क, उड़ती धूल और कीड़े लगे शौचालय के कारण लोग परेशान रहते हैं. बैरिकेडिग और स्थायी घाट नहीं रहने के कारण डूबना आम बात है. गंगाघाट किनारे रोशनी और पीने के पानी की व्यवस्था होने की बात भी करना बेमानी होगी.

सर्वमंगला सिद्धाश्रम के संस्थापक स्वामी चिदात्मन जी कहते हैं कि सिमरिया धाम में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओंं के साथ-साथ हरिद्वार की तरह सिमरिया गंगातट पर जानकी पौड़ी का निर्माण करवाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार को सार्थक पहल करनी चाहिए.

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/विभाकर