प्रवासियों के दर्द पर मरहम साबित होगा ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’

गरीब कल्याण योजना
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बेगूसराय, 28 जून (हि.स.). देश के विभिन्न शहरों से प्रवासियों के आने का सिलसिला जारी है. परदेस में मिले दर्द को झेलते हुए प्रवासी जब अपने जन्मभूमि पर पहुंच रहे हैं तो इनके सारे दर्द दूर हो रहे हैं लेकिन दिखावटी तौर पर. जिस शहर को इन्होंने प्रगतिशील बनाया, उसी शहर में मिले दुख को ये दिल से भूल नहीं पा रहे हैं. हालांकि संतोष है कि सब के हित में सोचने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इनके दर्द पर मलहम लगाने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू कर दिया.

शायद इससे उनके सभी दर्द दूर हो जाएं. वह आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे, प्रगतिशील बनेंगे. कोरोना बचाने के लिए लागू लॉकडाउन से सबसे अधिक श्रमशक्ति प्रभावित हुई है, कोरोना ने उनके रोजगार पर गहरा चोट किया. शहरों की किस्मत गढ़ने वाले बेरोजगार हो गए, मुश्किल समय में इनके श्रम को भुला दिया गया. अपने कठोर श्रमशक्ति से शहरों के विकास की इबारत लिखने वाले श्रमिक ठगा सा खाली हाथ अपने गांव-घर लौट गए हैं. 

परदेस से लौटने वाले कामगारों में से सैकड़ों लोगों ने फिर वापस नहीं जाने का निर्णय लिया था लेकिन इन प्रवासियों में से ऐसे भी हैं जो कि परदेस में बसा बसाया अपना सब कुछ छोड़ कर, सब कुछ बेचकर, सब कुछ भूलकर अब गांव आ गए हैं. यहीं पर रोजी रोजगार की व्यवस्था करेंगे, रोजी रोजगार स्थायी हो ताकि उन्हें फिर जाना नहीं पड़े. बाहर रहने वाले ढेर सारे श्रमिक भी अब एंड्रायड मोबाइल रखते हैं.

इस मोबाइल से जब उन्हें जानकारी मिली की प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया है तो इन लोगों ने उसके तथ्यों को खंगालना शुरू किया. स्पष्ट हो गया कि 50 हजार करोड़ से शुरू किया गया यह अभियान श्रमिकों के लिए वरदान साबित होगा. खासकर बिहार के श्रमिकों को इससे काफी फायदा होगा, उन्हें विभिन्न विभागों में काम मिलेगा तो वह काफी उत्साहित हैं तथा जहां रह रहे थे वहां का सब कुछ त्याग दिया. घर आए लोग यहां विभिन्न विभागों में काम करेंगे, एमएसएमई के तहत स्वरोजगार करेंगे. 

ऐसे ही सोच रखने वाले श्रमिकों से मुलाकात हुई बेगूसराय स्टेशन पर. सिल्चर में बिजली वायरिंग से संबंधित सामानों का दुकान चलाने के साथ-साथ वहीं ठेकेदारी करने वाले विनोद कुमार अपने पत्नी राधा देवी तथा तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ गांव वापस आ गए हैं. इन्होंने एक लाख 25 हजार में ही अपना दुकान बेच दिया. विनोद ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस महत्वाकांक्षी योजना गरीब कल्याण रोजगार अभियान में हमारे जिला बेगूसराय का भी चयन हुआ है. यह हम लोगों के लिए खुशी की बात है.

वहां अच्छी कमाई हो रही थी लेकिन बिहारी कहलाने का दर्द झेलना पड़ता था. लॉकडाउन के दौरान वहां काफी परेशानी हुई, काम बंद हो गया था. जिनके यहां पैसा बकाया था, उन लोगों ने भी लॉकडाउन के बहाने तत्काल पैसा देने से इंकार कर दिया तो इसी बीच प्रधानमंत्री के अभियान की जानकारी मिली. हम लोग तत्काल में टिकट लेकर गांव आ गए हैं, अब नहीं जाएंगे वापस. बिजली से संबंधित स्किल है मेरे पास, यहीं रोजगार कर घर परिवार के आत्मनिर्भर बनेंगे. 

विनोद ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन की पहल शुरू कर दी. पता चला है कि इस अभियान के तहत ग्रामीण विकास, पंचायती राज, रेलवे, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क और राजमार्ग तथा कृषि समेत अन्य क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. यह अभियान देश की गरीब आबादी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वरदान साबित होगा.

परदेसी शहरों से गांव लौटी श्रमशक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देंगी. श्रमिकों को अपने गांव के आस-पास रोजगार मिलेगा, तो सबके सब आत्मनिर्भर हो जाएंगे. गांव और प्रवासी श्रमिकों के विकास को पंख लगेगा. शहरों को संवारने वाले अब गांवों के विकास की इबारत लिखेंगे. रोजी-रोटी के लिए पलायन का दर्द नहीं झेलनी पड़ेगी. कुल मिलाकर विभिन्न परदेसों से लौटे प्रवासी कह रहे हैं कि कम कमाएंगे लेकिन बाहर नहीं जाएंगे.

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र