आरोपों के घेरे में हामिद अंसारी

बद्रीनाथ वर्मा

हमीद और हामिद दो ऐसे नाम हैं, जिन्हें हम-आप बखूबी जानते हैं. जी हां, हमीद यानी वीर अब्दुल हमीद. सन् 1965 भारत-पाक युद्ध के नायक.

और हामिद यानी हामिद अंसारी, देश के पूर्व उपराष्ट्रपति. जब तक कुर्सी पर थे बागों में बहार थी. हर तरफ हरियाली थी. पूरे देश में भाई चारा था.

लेकिन कुर्सी से हटते समय अचानक उन्हें यह ब्रह्मज्ञान हुआ कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है.

वैसे वीर अब्दुल हमीद से हामिद अंसारी की कोई तुलना तो नहीं हो सकती, लेकिन दोनों के बीच एक साम्य जरूर है. दोनों का ही संबंध पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से है.

एक के साथ शौर्य जुड़ा है तो दूसरे के साथ ताजा विवाद. वैसे हामिद अंसारी की एक पहचान और है. वे डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी के परिवार से आते हैं.

आजकल उस परिवार को डॉन मुख्तार अंसारी के नाम से पहचाना जाता है. बहरहाल, रॉ के एक रिटायर्ड अफसर एन के सूद ने पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को लेकर बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है.

इसके अनुसार 1990-92 के दौरान ईरान में भारतीय राजदूत रहते हुए अंसारी ने तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहां काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था.

जब कोई भारतीय विदेश में मुसीबत में होता है तो भारत की एम्बेसी उसका आखिरी सहारा होती है. लेकिन अंसारी ने ईरान की खुफिया एजेंसी ह्यसवाकह्ण (एसएवीएके) द्वारा अपहृत चार अफसरों की रिहाई के लिए कुछ भी नहीं किया.

उल्टे भारत सरकार को गलत सलत रिपोर्ट भेज दी. हैरान करने वाली बात यह है कि इन आरोपों पर पूर्व राष्ट्रपति ने बिल्कुल ही खामोशी की चादर ओढ़ ली है.

उनकी तरफ से अभी तक कोई बयान जारी नहीं हुआ है. हामिद अंसारी से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क न हो सका.

खैर, हामिद अंसारी दूसरे ऐसे शख्स हैं जो लगातार दो बार देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर रहे. उनके पहले सर्वपल्ली राधाकृष्णन लगातार दो बार उप राष्ट्रपति रहे थे.

साल 2010 में रॉ से रिटायर सूद का यह भी दावा है कि अंसारी ने 1993 मुंबई बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट का पूरी तरह से भट्ठा बैठा दिया था.

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 45 अंक में…

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