अद्भुत रहा है प्रणव दा का राजनीतिक जीवन, ये हैं उनसे जुड़ी 20 बड़ी बातें

नई दिल्ली. अपने 50 साल लंबे राजनीतिक सफर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कभी हार नहीं मानी. हर परिस्थिति में वे डटे रहे और राजनीति के शिखर तक पहुंचे. प्रणब मुखर्जी देश के छठे ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न के लिए चुना गया है.

1- ‘प्रणब दा’ के नाम से पहचाने जाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे प्रणब मुखर्जी देश के छठे ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न के लिए चुना गया है.

2- 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में बसे छोटे से गांव मिराती में प्रणब मुखर्जी का जन्म हुआ. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस नेता थे.

3- पश्चिम बंगाल के मिराती गांव के एक स्कूली छात्र से लेकर भारत के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक बनने तक मुखर्जी ने लंबा सफर तय किया.

4- खाली समय में प्रणब मुखर्जी पढ़ना, संगीत सुनना और बागवानी करना पसंद करते हैं. एक आम आदमी की तरह ही प्रणब मुखर्जी कला और संस्कृति से जुड़े हुए हैं. उन्हें घूमने फिरने का भी शौक है.

5- बतौर सांसद प्रणब मुखर्जी अपने जीवन के लगभग 40 साल भारतीय संसद में बिता चुके हैं. वे 5 बार राज्यसभा सांसद और 2 बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा प्रणब मुखर्जी कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था यानि कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य रहे.

6- राजनीतिक कुशाग्रता और सभी दलों के बीच सर्वसम्मति बनाने की क्षमता रखने वाले मुखर्जी बिना किसी डर या पक्ष के दिमाग से बोलते हैं और वह उन नेताओं में से एक हैं जो अपने सिद्धांतों पर अड़े रहते हैं.

7- प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक हैं जिन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश हित में फैसले लिए हैं.

8-राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने इस पद की गरिमा बढ़ाने के साथ विदेशों में भारत का मान बढ़ाया. प्रणब मुखर्जी वास्तव में इस सम्मान के हकदार हैं.

9- 82 वर्ष के प्रणब मुखर्जी ने अपने जीवन के 40 वर्ष कांग्रेस पार्टी को समर्पित किए हैं. UPA के शासन में ही वो देश के राष्ट्रपति बन गये. 2012 से 2017 तक वो देश के राष्ट्रपति रहे.

10- 1982 में 47 साल की आयु में देश के सबसे यवा वित्त मंत्री बने थे, यूपीए सरकार में विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रालय संभाले

11- पिछले साल उनकी किताब का विमोचन करते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिहं ने कहा था-20014 में प्रणव ही दावेदार थे, लेकिन सोनिया गांधी ने मुझे चुना

12- ऐसा मुख्रजी के साथ 1984 में भी हुआ था वे इंदिरा के बाद नंबर-2 थे, लेकिन इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाया गया.

13- उनका सांसद बनने का राजनीतिक सफर सन् 1969 में कांग्रेस पार्टी द्वारा राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद शुरू हुआ है.

14- लंबे समय तक कांग्रेस के एक वफादार नेता के तौर पर प्रणब दा ने अपनी पार्टी की सरकार में कई अहम मंत्रालय संभाला.

15-पहली बार 1984 में बड़ी जिम्मेदारी देते हुए प्रणब मुखर्जी को देश का वित्त मंत्री बनाया गया.

16- इसके बाद नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने 1995 से लेकर 1996 तक विदेश मंत्री के रूप में भी काम किया.

17- यही नहीं 2004 और 2009 की UPA 1 और UPA 2 सरकार में उन्हें अहम पदों का कार्यभार सौंपा गया.

18-अंत में उन्होंने 25 जुलाई 2012 को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली.

19- प्रणब मुखर्जी अचानक से चर्चा में तब आए जब राष्ट्रपति के पद से पदमुक्त होने के बाद वो RSS के एक समारोह में नागपुर चले गए थे.

20- 7 जून 2018 को प्रणब मुखर्जी ने RSS के मंच से देशभक्ति और राष्ट्रवाद की परिभाषा देश को समझाई थी.