भारत-चीन तनावः भारत को मिला फ्रांस का साथ, एस. जयशंकर ने फ्रांसीसी विदेश मंत्री से की बात

लद्दाख में चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारत के साथ कई देश खड़े हो गए हैं. अमेरिका, जापान के बाद अब फ्रांस ने भी चीन की हरकत को गलत ठहराया. और सीमा पर शहीद हुए जवानों के लिए दुख व्यक्त किया.

इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज (मंगलवार को) फ्रांस के विदेश मंत्री जीन यवेस ले ड्रियन के साथ बातचीत की. दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक महत्व से जुड़े समकालीन वैश्विक विषयों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.

भारत के विदेश मंत्री ने ट्वीट कर बताया कि फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें वर्तमान समय में सुरक्षा और राजनीतिक महत्व के विषय भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कोविड से जुड़े स्वास्थ्य और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के समक्ष आई चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने पर सहमति बनी.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का मजबूती से सहयोग करने को लेकर जयशंकर ने फ्रांस का धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि भारत-फ्रांस साथ मिलकर काम वैश्विक स्तर पर कई काम कर सकते हैं. इससे पहले दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मसलों पर विदेश सचिव स्तर पर चर्चा हुई थी.

सोमवार को विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला और फ्रांस के विदेश मामलों के महासचिव फ्रैंकोइस देलेट्रे के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 महामारी और कई मोर्चों पर सहयोग से जुड़े विषयों पर हुई प्रगति पर चर्चा हुई.

इससे पहले फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने कल (सोमवार को) भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर चीन के व्यवहार को गलत बताया था. उन्होंने LAC पर शहीद हुए जवानों के लिए भी दुख जाहिर किया था. और उनके परिजनों के प्रति संवेदना जताई थी.

फ्लोरेंस पार्ली ने राजनाथ सिंह से कहा कि भारत के हर मुश्किल घड़ी में फ्रांस उसके साथ है. उन्होंने राजनाथ को विश्वास दिलाया कि यदि आवश्यक्ता पड़ी तो फ्रांसीसी सशस्त्र बल भी भारत की मदद करेगा.

इसके अलावा फ्रांस ने 6 राफेल की डिलीवरी तय समय से पहले करने का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया है. ये खेप 27 जुलाई तक भारत पहुंच जाएगी.

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