डेंगू की दस्तक, दिल्ली में सामने आया पहला मामला

दिल्ली में डेंगू ने एक बार फिर से दस्तक दे दी है. नए साल में सोमवार 04 फरवरी को डेंगू का यह पहला मामला सामने आया है. इसकी पुष्टि साउथ एमसीडी की ओर से जारी एक रिपोर्ट से हुई है.

साउथ एमसीडी को Mosquito-borne बीमारियों के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर बनाया गया है. आंकड़ों पर गौर करें तो डेंगू पिछले दो सालों से आफसीजन में ही पैर पसारने शुरू कर देता है.

आमतौर पर यह बीमारी जुलाई से नवंबर महीने के बीच फैलती है. बारीश के मौसम में डेंगू की बीमारी अधिकतर लोगों को संक्रमति करती है. 

जानें पिछले साल का रिकॅार्ड

इससे पहले जनवरी माह में साल 2017 के दौरान 4, 2018 में 6 मामले सामने आए थे. 2018 में डेंगू के 2,798 मामले दर्ज किए गए थे. 

इस दौरान डेंगू ने चार लोगों को अपना शिकार बनाया. इनकी पहचान अमन तिवारी (13), संस्कृति (21) और गगन (23) के रूप में हुई थी. पिछले पांच साल के आंकड़ों की मानें तो साल 2015 में सबसे ज्यादा 15867 मामले दर्ज किए गए थे. 

साल 2015 में डेंगू से 60 लोगों की मौत भी हो गई थी. जुलाई से नवंबर माह के बीच डेंगू का संक्रमण तेजी से फैलता है क्योंकि इसी दौरान मच्छर पनपते हैं. 

ऐसे मच्छरों का प्रजनन डेजर्ट कूलर, बिना ढक़े पानी के भंडार और बर्तनों तथा पुराने टायरों में पानी जमा होने के कारण होता है.वर्षा के मौसम में इस प्रकार के जलभराव की संभावना बढ़ जाती है.

ऐसे फैलता है डेंगू

डेंगू पेशेंट के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है. जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी पेशेंट को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है. खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है. जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है.

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