हिमाचल के जंगलों में लगी भीषण आग

गर्मी के मौसम में तापमान में बढ़ोतरी से राजधानी शिमला के जंगल भीषण आग (Fire) से खाक हो रहे हैं. बालूगंज थाना क्षेत्र के तहत तारा देवी के आगे कालका-शिमला हाइवे किनारे जंगल में रविवार देर रात भयंकर आग लग गई. आग से आईटीबीपी कैम्प को भी खतरा पैदा हो गया है.

सूचना मिलने पर बालूगंज अग्निशमन केंद्र से वाटर टैंडर के साथ पहुंचे दमकल कर्मी आग बुझाने में जुटे. आईटीबीपी के जवानों के साथ वन विभाग के कर्मी भी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सोमवार सुबह तक जंगल में आग शांत नहीं हो पाई. अब तक कई किलोमीटर वन्य क्षेत्र आग से राख हो चुका है.

बालूगंज इलाके में ही बडैहरी गांव के निकट चीड़ के जंगल में भी बीती रात से भीषण आग लगी है. आगजनी से आसपास के गांवों के लोग सहमे हुए हैं. अग्निशमन अधिकारी डीसी शर्मा ने सोमवार को बताया कि वाटर टेंडरों की मदद से आग बुझाने के प्रयास जारी हैं.

प्रदेश में प्रचंड गर्मी के कारण आग की घटनाएं बढ़ गई हैं. इस साल अभी तक 229 घटनाएं सामने आई हैं. इनमें 1053 हेक्टेयर वन भूमि को नुकसान पहुंचा है.

आग से अब तक 571. 53 हेक्टेयर प्राकृतिक और 186.10 हेक्टेयर क्षेत्र के प्लांटेशन को नुकसान हुआ है. 295.94 हेक्टेयर अन्य क्षेत्र प्रभावित हुआ है. कुल 1053.17 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है. आग से नुकसान 18 लाख 17 हजार 435 रूपये का आंका गया है.

कांगड़ा के जंगलों में भी लगी आग

कांगड़ा के परौर में सड़क किनारे जंगल में लगी आग और भयावह होते जा रही है. आग का दायरा बढ़ता जा रहा है लेकिन काफी देर से लगी आग को बुझाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है और न ही वन विभाग को किसी ने भी आगजनी की सूचना दी है.

जहां एक ओर जंगल में लगी आग से हजारों छोटे-बड़े पेड़ जलकर नष्ट हो रहें है. इतना ही नहीं इस आपदा से जंगली जीव-जंतुओं पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है. 

हर साल गर्मी का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र के जंगलों में आग लग जाती है. इससे बचाव के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं.

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