13 साल बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में शामिल हुईं ये महिला जज

भानुमति
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नई दिल्ली. जस्टिस आर भानुमति 13 साल से भी अधिक समय के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) कॉलेजियम में शामिल होने वाली पहली महिला जज बन गई हैं. भानुमती, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रविवार को रिटायर होने के बाद इसका हिस्सा बन गईं.

दरअसल, जस्टिस भानुमति को सुप्रीम कोर्ट की 5वीं सीनियर मोस्ट जस्टिस होने के नाते कॉलेजियम का हिस्सा बनाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के कुल 34 जजों में मात्र 3 महिलाएं हैं. इनमें जस्टिस भानुमति, जस्टिस इंदु मलहोत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी के नाम शामिल हैं.

जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सदस्य होंगी. वो पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की जगह लेंगी. सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश इसके सदस्य होते हैं. जस्टिस गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद जगह खाली थी.

13 साल बाद कोई महिला जज कॉलेजियम का हिस्सा बनी है. उनसे पहले जस्टिस रूमा पाल 2006 में रिटायर होने तक कॉलेजियम की हिस्सा रहीं थी.

कॉलेजियम अलग-अलग हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करता है. अब कॉलेजियम में सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस भानुमति होंगी. जस्टिस भानुमति 13 अगस्त, 2014 को सुप्रीम कोर्ट में जज बनीं थीं.

भानुमति तमिलनाडु से आने वाली पहली महिला जज हैं और वो झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुकी हैं. मद्रास हाई कोर्ट में जज रहते हुए उन्होंने राज्य के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर रोक लगा दी थी.

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस खेल को ‘क्रूर’ बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया था.

भानुमति उन कुछ चुनिंदा जजों में से हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति का खुलासा किया है. वह उन 9 जजों की बेंच में भी शामिल थीं, जिसने कॉलेजियम सिस्टम को स्थापित करने और उसे संस्थागत बनाने के शीर्ष अदालत के दोहरे फैसलों की समीक्षा करने से इनकार कर दिया था.

जस्टिस भानुमती का जन्म तमिलनाडु में 20 जुलाई 1955 को हुआभानुमति ने तमिलनाडु हायर ज्यूडिशियल सेवा से अपनी शुरुआत की.

जस्टिस भानुमति (Justice Bhanumati) को आपराधिक मामलों से कुशलता से निपटने के लिए जाना जाता है. उन्होंने 1981 में वकील के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी.

आर. भानुमति दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया गैंगरेप केस का फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा थीं.