किडनी का सौदा कर रहे किसान

सुधीर जोशी

तीन वर्ष से अकाल का सामना कर रहे हिंगोली जिले के सेनगांव के एक किसान ने तहसीलदार जीवराज कांबले को एक पत्र लिखा.

किसान ने तहसीलदार से गुजारिश की कि उसे बीज और खाद मुहैय्या कराने के बदले कीमत के रूप में उसकी एक किडनी ले ली जाए. किसान की इस पेशकश से तहसीलदार हक्के बक्के रह गए.

सेनगांव ऐसा गांव है, जहां वर्षा होती ही नहीं या होती है तो इतनी कम कि उससे सिंचाई नहीं की जा सकती. यहां के किसानों को बुआई से लेकर फसल तैयार होने तक का खर्च भी बड़ी मुश्किल से मिल पाता है.

हर साल घटते जा रहे कृषि उत्पादन ने तहसील के किसानों का बजट ही बिगाड़ दिया है. किसानों ने हालांकि नई उम्मीद के साथ खरीफ फसल की तैयारी तो की थी लेकिन बीज तथा खाद खरीदने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं है.

तीन वर्ष से कई अल्पभूमिधारक किसान फसल की बर्बादी से परेशान हैं. फसल न होने के कारण किसान अपना कर्ज भी चुकता नहीं कर पाए हैं.

सरकार से पत्र के माध्यम से निवेदन करने के बावजूद किसानों के हाथ कुछ भी नहीं लगा है. कर्ज के बढ़ते बोझ तथा इस वर्ष भी फसल बर्बाद होने की आशंका के कारण किसान तहसीलदार कार्यालय पहुंच रहे हैं.

किसानों की ऐसी हालत सिर्फ सेनगांव में ही नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के किसान परेशान हैं. विदर्भ, मराठवाड़ा में 20 प्रतिशत उत्पादन कम होने से किसानों की हालत और भी ज्यादा दयनीय हो गई है.

राज्य में वित्त वर्ष 2018-2019 में 94% खरीफ फसल की बुवाई हुई है. इधर, जलाशयों में पानी का घटना और मानसूनी वर्षा समय पर न होने से स्थिति ज्यादा भयावह हो गई है.

पिछले पांच महीनों में 809 किसानों की आत्महत्या कृषि प्रधान देश के प्रगतिशील राज्य महाराष्ट्र की हालत बयां कर रही है. अकाल, फसल न होने, निजी साहुकारों तथा बैंकों के कर्ज के बोझ तले दबे अधिकतर किसानों के पास बच्चों की शिक्षा और विवाह तक के पैसे नहीं हैं.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 01-15 जुलाई अंक में…

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