Gandhiji Exhibition
Gandhiji Exhibition

शालू शुक्ला

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ का जश्न देश भर में जहां-तहां देखने को मिल रहा है. इसी जश्न की एक झलक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित एक प्रदर्शनी में दिखी. 

प्रदर्शनी का नाम था- गांधी विरासत. इसका आयोजन ‘दस्तकारी हाट’ समीति ने किया था. इस समीति की अध्यक्ष स्वयं जया जेटली हैं. प्रदर्शनी के संबंध में जब उनसे बात हुई तो वे बोली, “हम अक्सर सांसारिक भ्रम में अपनी भारतीय सभ्यता और कला को भूल जाते हैं. 

हमारे पास हस्तकागज की भरमार है, जिसकी दुनिया में बहुत मांग है.” इसकी क्रम में वे बोली कि ‘प्रदर्शनी का उद्देश्य पर्यावरण, कलाकार, हस्तकागज के कारिगर और कला के छात्रों को प्रेरित करना था. 

साथ ही इसकी मदद से हमने गांधी को याद किया है.’ प्रदर्शनी में कुल ग्यारह खुशनवीसी कलाकारों की सुंदर प्रस्तुतियां हैं, जिन्होंने गांधी के विचार, बोल और सोच को कागज पर अनोखे ढंग से उकेरा है.

प्रदर्शनी में कहीं उर्दू से सजे वर्ण चहलकदमी करते दिखे, तो कहीं पर हिंदी शब्दों का वर्ण जाल अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था. खुशनवीसी को बढ़ावा देते हुए वहां आने वाले छात्र और दर्शकों को भी खुशनवीसी सिखाने की अच्छी व्यवस्था की गई थी. 

इसके लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें कई युवाओं ने हिस्सा भाग लिया. कला केंद्र के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय इस प्रदर्शनी को मात्र प्रदर्शनी नहीं मानते, बल्कि इसमें छुपे अर्थ की तरफ ध्यान आकर्षित करने की बात कहते हैं. 

वे बोले कि आज जिस दौर में डिजीटल वस्तुओं का महत्व प्रभावपूर्ण तरीके से बढ़ रहा है, उसमें ऐसी कला के प्रति लोगों का रुझान सराहनीय है. हमें अपनी कला और विरासत को नहीं भूलना चाहिए. 

ये हमारी ऐतिहासिक कला के साक्ष्य हैं. प्रदर्शनी के जरिए आमजन का परिचय अपनी विरासत से हो रहा है. महात्मा गांधी हमेशा ही सतत विकास और जैविक खेती को महत्व देते रहे. 

इसके तहत पूरे देश में उन्होंने देशज उत्पादों का निर्माण करने और उसके उपयोग के लिए आंदोलन किया. लेकिन, देशी पद्धति और जैविक खेती की उपज से भरपूर भारतीय मिट्टी में आज कठोरता नजर आती है. 

पढ़े पूरा लेख नवोत्थान के मार्च के अंक में…