Chhattisgarh: साढ़े छह साल बाद भी बेरोजगारों को वापस नहीं मिली राशि

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  • वर्ष 2013-14 में भृत्य के 624 पदों के लिए जिला शिक्षा विभाग ने निकाली थी वैकेंसी

धमतरी . साढ़े छह साल बाद भी भृत्य भर्ती के लिए आवेदन जमा करने वाले प्रदेशभर के हजारों बेरोजगारों को जमा की गई उनके डिमांड ड्राफ‌ट की राशि जिला शिक्षा विभाग ने वापस नहीं लौटाई है. इस राशि को बैंक में जमा कर विभाग हर साल लाखों रूपये बढ़ा रहे हैं. करीब 90 लाख रूपये अब एक करोड़ के आसपास हो गया है.

जिला शिक्षा विभाग धमतरी ने वर्ष 2013-14 में जिलेभर के शासकीय स्कूलों में रिक्त भृत्य पद की भर्ती के लिए प्रदेश स्तर पर वैकेंसी निकाली थी. इसके लिए करीब 75 हजार से अधिक बेरोजगारों ने आवेदन किए थे.

वर्गवार डिमांड ड्राफ‌ट की राशि अलग-अलग निर्धारित थी. बेरोजगारों से डीडी के रूप में विभाग को करीब 90 लाख रूपये प्राप्त हुआ था. भर्ती प्रकिया के लिए आवेदनों की स्क्रूटनी पूरी हो गई थी और पात्र-अपात्र की लिस्ट निकलने वाली थी, ऐसे समय पर वित्त विभाग ने यह वैकेंसी को रद‌द कर दिया. इससे प्रदेशभर के बेरोजगारों में हड़कंप मच गया.

भर्ती को वित्त विभाग से अनुमति नहीं

जिला प्रशासन वित्त विभाग से भर्ती के लिए जब तक अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक भर्ती स्थगित कर दिया. भर्ती स्थगित हुए आज करीब साढ़े छह वर्ष होने को है, लेकिन बेरोजगारों के जमा डीडी की राशि अब तक बेरोजगारों को उनके पते पर शिक्षा विभाग नहीं भेजे है. एकत्र 90 लाख रूपये को शिक्षा विभाग के खाते में बैंक में जमा कर दिया है.

बेरोजगारों की जमा इस राशि को वापस करने के बजाए शिक्षा विभाग अधिकारी कभी शहीदों के परिजनों को दान देने की बात कहते हैं, तो कभी अन्य बातें. बैंक में यह राशि वर्तमान में एक करोड़ होने को है. इस राशि को बेरोजगारों को वापस करने या अन्य उपयोग के लिए जिला शिक्षा विभाग के साथ जिला प्रशासन भी अब तक कोई उचित निर्णय नहीं ले पाया है, इसका खामियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड़ रहा है.

सर्वसुविधायुक्त रेस्टहाउस बनाने की मांग

रूपये जमा करने वाले बेरोजगार मिलन साहू, यामिनी, देवेन्द्र कुमार, धर्मेन्द्र साहू आदि का कहना है कि जिला शिक्षा विभाग बेरोजगारों की इस राशि को वितरण न करें. बल्कि जिला स्तर पर प्रदेशभर से आने वाले बेरोजगारों के लिए रेस्ट हाउस का निर्माण करें, ताकि कभी भी परीक्षा व अन्य कार्यों से आने वाले दूसरे जिले के बेरोजगारों को महंगी राशि खर्च कर लॉज व होटल में ठहरना न पड़े.

जिला प्रशासन इस पर पहल करते हुए शासन से अनुमति लेकर इस राशि का उपयोग बेरोजगारों के लिए ठहरने के लिए किसी शासकीय जमीन पर रेस्टहाउस बनाएं. इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ रजनी नेल्सन ने कहा कि भृत्य भर्ती की राशि जमा होने की उन्हें जानकारी नहीं है. इस बारे में वह कार्यालय के संबंधित कर्मचारी से पता कर जल्द ही राशि के उपयोग पर वे निर्णय लेंगे.

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन