शादी के 5 साल बाद भी मां-बाप नहीं बन पाए तो अब इस तरह खुशी हासिल करना हुआ आसान

‘किराए की कोख’ को मान्यता देने संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश

नई दिल्ली. जो दंपति शादी के पांच साल बीत जाने के बाद भी मां-बाप नहीं बन पा रहे हैं उनके लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है. अब ऐसे दंपत्ति सरोगेसी ( दूसरी महिला के किराए की कोख) से मां-बाप बनने की खुशी हासिल कर सकते हैं.

इसके लिए जरुरी है कि महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए. उनके विवाह के कम से कम पांच साल की अवधि बीत जाने के बाद ही वे किराए की कोख का इस्तेमाल कर सकेंगे.

संतानहीन दंपत्तियों के लिए खुशखबरी का यह प्रस्ताव दूसरी महिला की (किराए की) कोख से अपने बच्चे को जन्म दिलाने की प्रक्रिया को देश में कानूनी मान्यता दिलाने और इसको नियमित करने संबंधित विधेयक में किया गया है.

सेरोगेसी का अर्थ किराए की कोख है निःसंतान दंपत्ति इसके जरिए मेडिकल तकनीक से किसी अन्य महिला के गर्भ से अपने बच्चे को जन्म देते हैं.

सोमवार को यह लोकसभा में पेश किया गया. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया.

सेरोगेसी (विनियमन) विधेयक -2019 को लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पेश किया. विधेयक में प्रावधान है कि संतान पैदा करने में असमर्थ विवाहित भारतीय दंपति को ‘किराए की कोख’ के जरिए संतान सुख प्राप्त करने की अनुमति होगी.

पेश विधेयक में और क्या?

1- पेश विधेयक में सरोगेट मां का शोषण रोकने और उनका तथा सरोगेट बच्चों के अधिकार तय करने का भी प्रावधान है.

2- इसमें सरोगेसी के लिए मानव भ्रूण की बिक्री या आयात पर कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

3-साथ ही जिस महिला से किराए की कोख ली जाएगी, उसका भारतीय नागरिक तथा संतान चाहने वाले दंपति का निकट संबंधी होना अनिवार्य होगा.

4- यह भी जरूरी किया गया है कि वह कभी न कभी शादीशुदा रही हो और उसकी अपनी संतान हो चुकी हो। उसकी आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होना जरूरी होगा.

5- विधेयक में राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरों पर सरोगेसी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान किया गया है. इनका काम इस कानून को लागू करना होगा. यह कानून बन जाने के बाद सरोगेसी सेवा देने वाले हर क्लीनिक को पंजीकरण कराना होगा

हालांकि इस विधेयक का कांग्रेस ने विरोध किया. कांग्रेसी सांसद शशि थरुर ने कहा कि समान लिंग वाले जोड़ों को सेरोगेसी का अधिकार नहीं दिया गया है.

थरुर ने कहा कि जबकि यह दुनियाभर में स्थापित है कि समान लिंग वाले जोड़े भी एक अच्छे अभिभावक बनते हैं. उन्होंने कहा कि इस विधेयक में यह प्रावधान है कि बच्चे न पैदा कर सकने की बात मेडिकली प्रमाणित होने के बाद पांच साल का इंतजार करना पड़ेगा.

हिन्दुस्थान समाचार/अजीत/बच्चन

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