इंजीनियर से बने किसान, बदल दी खेती की तस्वीर जानिए कैसे

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हमारे देश में आज भी पारंपरिक ढंग से खेती की जाती है. जिसके परिणाम स्वरूप खेती को अशिक्षित और लोगों का व्यवसाय समझा जाता है. लेकिन अब देश में खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. खेती में पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल युवा अपने हाथ आजमा रहे हैं. जिसके परिणाम स्वरूप पारंपरिक खेती का स्वरूप बदल रहा है. युवा लोग खेती में नए प्रयोग करके उसको लाभकारी व्यवसाय का रूप दे रहे हैं.

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे युवक की जिसने इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी को छोड़ कर खेती को अपनाया जी हां यह है इंजीनियर से किसान बने नीरज ढाँडा जिन्होंने अपने खेत पर अमरूद की खेती शुरू करके खेती में मिसाल कायम की और अमरूद को500 से ₹600 प्रति किलो के हिसाब से ऑनलाइन बेच भी रहे हैं.

हरियाणा के रोहतक जिले में रहने वाले नीरज एक किसान परिवार से आते हैं. उन्होंने पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाते हुए कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की खेती में कुछ अलग करने की इच्छा उनके मन में काफी पहले से थी. नीरज जब भी अपने बड़ों के साथ मंडी में फसल बेचने जाते थे तो उन्हें बिचौलियों द्वारा किसान का शोषण करते देखकर दुख होता था. उनको ऐसा लगता था कि किसान की मेहनत से उगाई गई फसल का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है.

नीरज ने खेती में पहला प्रयास चेरी की खेती को लेकर किया जिसके लिए उन्होंने जींद से 7 किलोमीटर आगे एक जगह संगतपुरा को चुना वही पैसों का इंतजाम नौकरी करके बचाई गए पैसों से किया. उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ. उन्होंने हार नहीं मानी इस बार उन्होंने अमरूद की खेती का मन बनाया और इलाहाबाद के कायमगंज की नर्सरी से अमरूद के कुछ पौधे मंगाकर खेतों में लगाए.

नीरज का प्रयोग सफल हो गया और अमरूद की फसल काफी अच्छीें हुई. लेकिन मंडी में बेचते वक्त उनके सामने फिर वही बिचौलियों वाली समस्या आई. उनके अमरूद की कीमत वहां ₹7 प्रति किलो लगाई गई. नीरज ने अलग तरकीब लगाकर गांव की चौपाल और गांव से सटे शहरों के चौराहों पर कुल मिलाकर 6 काउंटर बनाए और मंडी से दोगुने दामों में अमरूदों को बेचा साथ ही कई थोक विक्रेता भी नीरज के खेतों तक पहुंचने लगे.

नीरज को अमरूदों को जल्दी बेचने की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन उस परेशानी को भी नीरज ने दूर करने का रास्ता निकाल लिया.वह छत्तीसगढ़ की नर्सरी से थाईलैंड के जंबो अमरूद की पौध खरीद कर लाए और अपने खेतों में लगाया.

नीरज की मेहनत रंग लाई और अमरूद का डेढ़ किलो तक का फल अपने बागान में उगाया. नीरज ने पौधों में खेतों के वेस्ट प्रोडक्ट से बनी ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल किया.अब नीरज ने अपनी कंपनी बनाई और हाईवे बेल्ट पर अमरूदों की ऑनलाइन डिलीवरी की शुरुआत की.

ऑर्डर से लेकर डिलीवरी तक के तकनीक का इस्तेमाल किया सिर्फ यही नहीं उनकी तकनीक से यह भी पता लगाया जा सकता है कि अमरूद किस दिन बाग से टूटा और उन तक कब पहुंचा है. जंबो अमरूद की खासियत यह है कि इसकी ताजगी लगभग 10 से 15 दिनों तक बनी रहती है.

वही अमरूद की डिलीवरी का टारगेट 36 घंटे का सेट किया गया है. नीरज की लोकप्रियता भी बढ़ने लगी है और कुरुक्षेत्र के गीता जयंती महोत्सव में नीरज के स्टाल पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली. नीरज के अमरूद के बागों की जानकारी लेने के लिए दूरदराज के किसान भी पहुंचने लगे है और भविष्य में वह पर्यटन खेती के माध्यम से कमाई में इजाफा करने का प्लान बना रहे हैं. इतना ही नहीं नीरज ने आगे ग्रीन टी ऑर्गेनिक गुड और शक्कर भी ऑनलाइन बेचने की योजना पूरी कर ली है जिसे वह जल्दी शुरू करने वाले हैं.

हिंदुस्थान समाचार/कर्मवीर सिंह तोमर