चुनावी हलचल तेज ,रायपुर बाजार से गायब दिखे चुनावी पोस्टर

रायपुर,01 नवम्बर । (हि.स.) राज्य में चुनावी सरगर्मी तेज है, फिर भी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर बाजार और चौक – चौराहों से चुनावी रौनक गायब है. इन जगहों पर झंडे, पोस्टर और बैनर दूर- दूर तक नजर नही आ रहे हैं.शहर में कुछ गिनी- चुनी जगहों पर ही होर्डिंग्स दिखने को मिले. आपको बता दें कि इस बार प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की लिमिट 28 लाख रुपए निर्धारित की गई है. जिसके चलते प्रत्याशी ज्यादा खर्च नही कर रहे हैं. यहां के स्थाई नागरिकों का कहना है कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार प्रत्याशियों में बैनर – पोस्टर लगवाने की ललक कम है. जिस वजह से बाजार और प्रिंटिंग प्रेस के कारोबार पर खासा असर पड़ा है. राजधानी की दुकानों पर भी झंडो का क्रेज नही दिखाई दे रहा है.

चुनाव आयोग ने की है सख्ती –

छत्तीसगढ़ राज्य के विधानसभा चुनावों में इस बार चुनाव आयोग का दबदबा कायम है. आयोग ने सख्त आदेश दिया है कि ज्यादा खर्च करने वाले प्रत्याशियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा. जिसके चलते प्रत्याशी हर कदम फूंक- फूंक कर रख रहे हैं. यही कारण है कि प्रत्याशियों के पोस्टर- बैनर गिनती के ही सड़कों पर दिख रहे हैं. कम पोस्टर- बैनर होने का एक कारण यह भी है कि राजधानी में दूसरे चरण में 20 नवम्बर को चुनाव होना है.

सड़कों पर सीएम के लगे हैं पोस्टर –

रायपुर की सड़कों और चौराहों पर सिर्फ छत्तीसगढ़ सीएम रमन सिंह के पोस्टर छाए हुए हैं.

प्रचार वाहन भी नदारद –

रायपुर की सड़कों पर कोई भी प्रचार वाहन दिखाई नही दे रहे हैं, स्थानीय लोग कैमरे पर आने में भी हिचक रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रत्याशियों के समर्थक बैनर- पोस्टर से प्रचार करने के बजाय दिन – रात घर – घर दस्तक देकर मतदाता को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए रिझा रहे हैं. मंदा हुआ धंधा – पंडरी बाजार जहाँ पोस्टर- बैनर की भरमार रहती थी वहाँ भी दुकानदार उदास बैठे हैं. उनका कहना है कि चुनाव प्रचार का समय धीरे – धीरे खतम हो रहा है, लेकिन अभी तक प्रत्याशी ऑर्डर देने नही आ रहे हैं. नाममात्र के ही प्रत्याशियों के ऑर्डर आए हैं और वह भी कुछ बड़े दलों के नेताओं के हैं. छोटी पार्टियां तो ऑर्डर देने तक की हिम्मत नही जुटा पा रही हैं. कभी तो चुनाव हजारों परिवारों की रोजी रोटी का जरिया बनता था पर अब तो एकदम सन्नाटा छाया रहता है.

सोशल मीडिया के जरिए हो रहा प्रचार –

आम जनता का कहना है कि सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए थोड़ा – बहुत प्रचार हो रहा है. जो प्रत्याशी सोशल मीडिया पर एक्टिव नही हैं, वो चुनावी संग्राम में पिछड़ते नजर आ रहे हैं।

मधुकर बाजपेयी / Madhukar Vajpayee

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