चुनावी चर्चा- नगमा के नाम पर……

मुंबई: अभिनेत्री नगमा, वही जिन्होंने यलगार में संजय दत्त और बागी में सलमान खान के साथ काम किया था, उनकी पहचान कांग्रेस पार्टी की महिला नेताओं में से हैं और इन चुनावों में वे स्टार कैंपेनर के तौर पर सक्रिय हैं.

विवेक ओबराय और नगमा का रिश्ता तल्खी में बदला– मीडिया में नगमा की इन चुनावों को लेकर चर्चा उस वक्त हुई थी, जब विवेक ओबराय दिल्ली में पीएम मोदी पर बनी फिल्म का प्रचार कर रहे थे और न्यूज चैनल के कार्यक्रम में नगमा के साथ विवेक का टकराव तल्खी में बदल गया था. विवेक और नगमा ने किसी फिल्म में कभी साथ काम नहीं किया, लेकिन विवेक के पिता सुरेश ओबराय के साथ वे काम कर चुकी हैं.

विवादों में नाम जुड़ने से पहले ही बच गया– नगमा का नाम एक राजनैतिक बवाल के साथ जुड़ सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस बवाल का मामला इन चुनावों में टिकट को लेकर है. नगमा का ज्यादातर वक्त मुंबई में कटता है. वे फिल्म एक्ट्रेस रही हैं और वे मानकर चल रही थीं कि पार्टी मुंबई की नार्थ सेंट्रल सीट से उनको टिकट देगी?

प्रिया दत्त कर चुकी थी राजनीति में शामिल होने का ऐलान– ये बात उस वक्त तक थी, जब प्रिया दत्त राजनीति से दूर जाने की बात कहकर चुनावों से दूर होने का ऐलान कर चुकी थीं. प्रिया दत्त के बाद नगमा ने खुद को इस सीट के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार मान लिया था.

कांग्रेस ने राहुल गांधी को दिया टिकट– राहुल गांधी की मुंबई में रैली हुई और इस रैली के बाद प्रिया दत्त की चुनावी राजनीति में वापसी ने नगमा का खेल बुरी तरह से बिगाड़ दिया. राहुल गांधी तय कर चुके थे कि टिकट प्रिया दत्त को ही मिलेगा. नगमा ने अंतिम हथियार के तौर पर मुंबई नार्थ के लिए जोर लगाया, जहां बाद में उर्मिला मातोंडकर को झटपट तरीके से पार्टी में शामिल करके सीधा चुनावी मैदान में उतार दिया गया.

नगमा ने बीजेपी से गुप-चुप तरीके से किया संपर्क– इस कदम ने तो नगमा के सब्र का बांध ही तोड़ डाला. ऐसे में नगमा ने वही किया, जो बागी नेता अक्सर किया करते हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से संपर्क किया. गुप-चुप तरीके से बातें हुई. लेन-देन की बात हुई, लेकिन मामला वहीं आकर रुक गया, जहां पर नगमा की गाड़ी कांग्रेस में रुकी थी.

किसी भी पार्टी से नहीं मिला टिकट– बीजेपी में शामिल होने की शर्त के तौर पर नगमा प्रिया दत्त और उर्मिला वाली सीट में से किसी एक का टिकट चाहती थीं और इसके लिए बीजेपी मानने को तैयार नहीं थी. नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस को नगमा जैसी स्टार कैंपेनर के खोने का दुख नहीं उठाना पड़ा और बीजेपी को ऐसा दुख होने का मौका ही नहीं मिला.
हिन्दुस्थान समाचार/अनुज