नई शिक्षा नीति से भारत बनेगा शिक्षा का वैश्विक गंतव्य : निशंक

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मौलिक परिवर्तनों जैसे कि अंतः शाखाओं में अध्ययन कार्यक्रम, छात्रों को अपनी सर्वश्रेष्ठ नैसर्गिक प्रतिभा के निखारने के लिए प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम, उनके मस्तिष्क को बंधे-बंधाए आजीविका के ढर्रे से मुक्त करना या दूसरों की महत्वाकांक्षा के बोझ ढोने से मुक्त होना, औपचारिक शिक्षा से अल्पअवकाश लेना और आईआईटी जैसे संस्थानों में नहीं होने के बावजूद शैक्षिक संसाधनों से सर्वश्रेष्ठ लाभ प्राप्त करना, जैसे प्रावधानों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने अंततः शिक्षा का लोकतंत्रीकरण किया है.

शिक्षा मंत्री ने भारतीय प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय मेधा का लोहा वैश्विक मंच पर स्वीकार भी किया जा रहा है – चाहे वह हमारी व्याकरण प्रणाली और संस्कृत भाषा हो या हमारी शास्त्रीय और लोक कलाओं के विभिन्न रूप हों, सभ्यता की शुरुआत करने वाली मानवजाति के संदर्भ में विज्ञान की खोज का एक नया नजरिया हो, भारत के पास इन सभी मामलों में और अन्य अनेक क्षेत्रों में अनेक समृद्ध संसाधन हैं. इसके अलावा, हमारी विविधता के कारण हम न केवल सामाजिक अध्ययन बल्कि साइबर भौतिकीय अध्ययन के सामाजिक पहलुओं के अनुभव को भी और समृद्ध कर सकते हैं.

आईआईटी खड़गपुर पूर्व छात्र फाउंडेशन इंडिया ने आईआईटी खड़गपुर के साथ मिलकर और आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन यूएसए, पैन आईआईटी इंडिया और पैन आईआईटी यूएसए द्वारा आयोजित वेबिनार में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, उच्च्च शिक्षा सचिव अमित खरे, आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. वी के तिवारी, पूर्व-छात्र फाउंडेशन इंडिया के अध्यक्ष वरदराजन शेषमानी, आईआईटी भुवनेश्वर बोर्ड के सदस्य एवं वेबिनार के अध्यक्ष कमांडर वी के जेटली, आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन, यूएसए, बोर्ड के सदस्य, पैन आईआईटी यूएसए, के अध्यक्ष रॉन (रणबीर) गुप्ता एवं अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे.

हिन्दुस्थान समाचार/सुशील