DU टीचर्स ने की एडमिशन कोटा बढ़ाने की मांग…
  • DU में कुल 5000 टीचर्स हैं, जबकि 3000 नॉन टीचिंग स्टाफ हैं. इस सभी का कोटा बीते 25 सालों से नहीं बढ़ा है
  • टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ अपनी हर ड्यूटी को पूरी तरह से निभाता है. मगर DU की ओर से मिलने वाला लाभ नहीं मिल पाता

दिल्ली यूनिवर्सिटी(DU) के कॉलेजों में कई टीचर्स और स्टाफ के कारण ही यहां स्टूडेंट्स को इतनी शानदार सुविधाएं मिल पाती हैं. वहीं इन टीचर्स और स्टाफ के बच्चों को भी DU में एडमिशन लेने का मौका नहीं मिल पा रहा है.

वहीं अब इससे तंग आकर टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ने एडमिशन के लिए वार्ड कोटा बढ़ाने की मांग की है. इसके लिए DU के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को भी लेटर लिखा गया है.

DU में हजारों टीचर्स

DU में कुल 5000 टीचर्स हैं, जबकि 3000 नॉन टीचिंग स्टाफ हैं. इस सभी का कोटा बीते 25 सालों से नहीं बढ़ा है. वहीं इस कोटे का लाभ लेने के लिए पहले यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन को पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

25 सालों से कोटा बढ़ने का इंतजार

रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही स्टूडेंट्स कॉलेजों में अप्लाई कर पाएंगे. वहीं टीचर्स का कहना है कि बीते 25 सालों से वार्ड कोटा बढा़या नहीं गया है. ऐसे में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को एडमिनिस्ट्रेशन से मिली सुविधा का लाभ भी नहीं मिल पाता है.

टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ अपनी हर ड्यूटी को पूरी तरह से निभाता है. मगर DU की ओर से मिलने वाला लाभ नहीं मिल पाता. इसमें सिर्फ यूनिवर्सिटी और प्रशासन का दोष है कि इतने सालों से इस कोटे को बढा़या नहीं गया.

इस बारे में DU के प्रोफेसर और ऐकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि DU की आखिरी कटऑफ में ही वार्ड कोटे के जरिए स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलता है.

एडमिशन लेने के लिए कुल तीन दिनों का टाइम स्टूडेंट्स को दिया जाता है. DU में कुल 80 कॉलेज हैं. इसके बाद इन सभी कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए मेरिट लिस्ट निकाली जाती है.

वहीं हर कॉलेज में सिर्फ तीन टीचिंग और तीन नॉन टीचिंग स्टाफ के बच्चों को ही एडमिशन दिए जाने का प्रावधान है. इस कोटे को बढ़ाने के लिए ही टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ने DU रजिस्ट्रार को कंप्लेंट लिखी है.

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