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  • रणजी ट्रॉफी में खराब अंपायरिंग को लेकर पहले भी कई मामले उठे चुके है. ऐसी में उम्मीद की जा रही थी. कॉनक्लेव में अंपायरिंग को लेकर बात की जाएगी
  • रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में चेतेश्वर पुजारा को आउट होने के बाद भी नॉटआउट दिया गया था

नई दिल्ली. बीसीसीआई की ओर से आयोजित रणजी कॉनक्लेव में घरेलू टीमों के कप्तानों और प्रशिक्षकों ने रणजी ट्रॉफी में डीआरएस लागू करने और टॉस में सिक्के के इस्तेमाल को खत्म करने के सुझाव दिए हैं.

रणजी ट्रॉफी में खराब अंपायरिंग को लेकर पहले भी कई मामले उठे चुके है. ऐसी में उम्मीद की जा रही थी. कॉनक्लेव में अंपायरिंग को लेकर बात की जाएगी. डीआरएस अभी तक सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेट में ही लागू किया है.

मगर बीते हुए सीजन में मैचों की संख्या बढ़ने के कारण कप्तान और प्रशिक्षकों ने मौजूदा तकनीक के साथ इसे घरेलू सीजन में भी लागू करने का सुझाव दिया है. आपको बता दे कि रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में चेतेश्वर पुजारा को आउट होने के बाद भी नॉटआउट दिया गया था.

जबकि गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर फील्डर के हाथों में पहुंची थी. इस मैच में खराब अंपायरिंग का फायदा उठाते हुए पुजारा ने शानदार शतक जमाया था और जिससे मैच का परिणाम बदल गया था.

इसके बाद चेतेश्वरे पुजारा की खेल भावना को लेकर भी कई तरह के आरोप मंढे गए. इसके अलावा टॉस को समाप्त कर मेजबान टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी चुनने की आजादी देने का सुझाव भी रखा गया है.

अब घरेलू सीजन में 37 टीमें हो गई हैं ऐसे में दलीप ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी को बनाए रखने को लेकर भी चर्चा हुई. इस पर सभी टीम के कप्तानों तथा प्रशिक्षकों से सलाह मांगी गई. इनके अलावा खेल सुधार, गेंद की गुणवत्ता, धीमी ओवर गति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

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