‘निर्भय’ मिसाइल के परीक्षण में आई खामी, DRDO ने खुद मार गिराया

Nirbhay Missile
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चीन से टकराव के बीच लद्दाख सीमा पर तैनात 1000 किमी. की दूरी तक मार करने वाली सबसे खतरनाक मिसाइल ‘निर्भय’ का आखिरी और 5वां परीक्षण सफल नहीं हो सका. मिसाइल में तकनीकी खराबी आ जाने से परीक्षण महज 8 मिनट के अंदर खत्म हो गया.

इससे पहले परमाणु सक्षम लॉन्ग रेंज सबसोनिक क्रूज मिसाइल निर्भय के चार परीक्षण किए जा चुके हैं. आज (सोमवार) हुए परीक्षण में डीआरडीओ ने निर्भय क्रूज मिसाइल को 8 मिनट के बाद खुद ही मार दिया. कुछ ही महीनों में परीक्षण के अगले दौर के बाद निर्भय मिसाइलों को औपचारिक रूप से सेना में शामिल किया जाएगा.

आकाश में मंडराने और पैंतरेबाजी के प्रदर्शन में माहिर यह मिसाइल लंबी दूरी तक परमाणु हथियार ले जाने और सभी मौसम में कई लक्ष्यों के बीच हमला करने में सक्षम है. 6 मीटर लंबी और लगभग 1500 किलो वजन वाली यह मिसाइल 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार कर सकती है.

दो पंखों के साथ यह मिसाइल 500 मीटर से लेकर 4 किमी. की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है. मिसाइल को टेक ऑफ के लिए ठोस रॉकेट बूस्टर द्वारा संचालित किया जाता है, जिसे उन्नत प्रणाली प्रयोगशाला (ASL) द्वारा विकसित किया गया है.

आवश्यक वेग और ऊंचाई तक पहुंचने पर मिसाइल में लगा टर्बोफैन इंजन इग्निशन के रूप में प्रयोग किया जाता है. इसे स्वदेशी अनुसंधान केंद्र (RCI) द्वारा विकसित एक अति उन्नत जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली और ऊंचाई निर्धारण के लिए रेडियो तुंगतामापी (ऑलटीमीटर) द्वारा निर्देशित किया जाता है.

दुश्मन के रडार से बचने के लिए यह नीची ऊंचाई पर भी उड़ान भर सकती है. यह मिशन की आवश्यकताओं के आधार पर अलग-अलग प्रकार के 24 हथियारों को वितरित करने में भी सक्षम है.

पहले परीक्षण में राह से भटकी

निर्भय मिसाइल के सतह संस्करण (ग्राउंड वर्जन) का परीक्षण पहली बार ओडिशा के बालासोर जिले में चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से 12 मार्च 2013 को किया गया. अपनी पहली उड़ान में मिसाइल बंगाल की खाड़ी में 1000 किमी की दूरी पर स्थित एक स्थिर लक्ष्य को भेदने वाली थी.

मिसाइल ने सफलतापूर्वक लांच पैड से उड़ान भरी और इग्निशन के दूसरे चरण में पहुंचकर 0.7 मैक की रफ्तार से 15 मिनट तक अपने निर्धारित पथ पर गई. इसके बाद यह अपने लक्ष्य से दूर मुड़ गई जिसकी वजह से मिसाइल को बीच रास्ते में ही नष्ट करना पड़ा था.

मिसाइल का निशाना भले ही चूक गया हो फिर भी इस परीक्षण को आंशिक सफलता के रूप देखा गया. क्योंकि मिसाइल ने मिशन के ज्यादातर उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया गया था. डीआरडीओ की जांच में दोषपूर्ण इनरशिअल नेविगेशन प्रणाली के बारे में पता चला जिसे बाद में सही कर लिया गया.

दूसरा परीक्षण पूरी तरह सफल रहा

17 अक्टूबर 2014 को एक बार फिर से मिसाइल के सतह संस्करण का परीक्षण ओडिशा के बालासोर जिले में चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया और इस बार परीक्षण सफल रहा. मिसाइल ने परीक्षण के सभी 15 मापदंडों पूरा किया.

मिसाइल 1000 किलोमीटर से अधिक दूर और 1 घंटे 10 मिनट की अवधि तक चली. मिसाइल को जमीन आधारित रडार की मदद से ट्रैक किया गया. भारतीय वायु सेना के लड़ाकू जेट जगुआर ने मिसाइल का पीछा करके उड़ान के दौरान की वीडियो बनाई.

तीसरे परीक्षण में हुई दुर्घटनाग्रस्त

मिसाइल का तीसरा टेस्ट 16 अक्टूबर 2015 को 11:38 बजे हुआ. मिसाइल का नीची उड़ान क्षमता के लिए परीक्षण किया जा रहा था. उड़ान के दौरान मिसाइल को 4800 मीटर से धीरे-धीरे 20 मीटर की दूरी पर लाना था.

सुखोई-30 एमकेआई विमान ने उड़ान को वीडियो टेप किया. मिसाइल के सभी शुरुआती आवश्यक ऑपरेशन सफल रहे लेकिन अपनी 1000 किमी. रेंज में से केवल 128 किमी. कवर करने के बाद 11 मिनट की उड़ान में मिसाइल बंगाल की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई.

चौथे परीक्षण में फिर राह भटकी

मिसाइल का चौथा टेस्ट 21 दिसम्बर 2016 को एकीकृत परीक्षण रेंज के प्रक्षेपण परिसर-III (ITR) बालासोर, ओडिशा में 11:56 बजे किया गया. इस परीक्षण के परिणाम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया लेकिन यह परीक्षण सफल नहीं था.

पहले चरण में बूस्टर इंजन ने काम शुरू किया और इसके लांचर ने मिसाइल को ऊपर उठाया लेकिन मिसाइल ने लिफ्ट बंद होने के दो मिनट बाद एक ओर खतरनाक तरीके से मुड़ना शुरू कर दिया और राह भटककर अपने सुरक्षा गलियारे के बाहर मुड़ गई.

इस कारण मिसाइल परीक्षण को निरस्त करना पड़ा और इसे दूर से नष्ट कर दिया गया. मिसाइल की विफलता के लिए एक संभावित कारण एक हार्डवेयर की समस्या को बताया गया.

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत