सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के इंट्री पर क्या है डॉ भागवत की राय?

केरल की सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के इंट्री को लेकर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भावगत ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि धर्म के मुद्दों पर धर्माचार्यों से बात होनी चाहिए. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अतंतोष फैला है.

संघ के विजयादशमी उत्सव के मौके पर डॉ भागवत ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे को भी उठाया. उन्होंने कहा कि सबरीमाला के निर्णय का उद्देश्य स्त्री-पुरुष समानता का था, लेकिन क्या हुआ?

धर्म के मुद्दे पर धर्माचार्यों से बात हो

संघ प्रमुख ने कहा कि  इतने सालों से परंपरा चल रही है वह टूट गई.  जिन्होंने याचिका डाली वो कभी मंदिर नहीं गए, जो महिलाएं आंदोलन कर रही हैं वो आस्था को मानती हैं. उन्होंने कहा कि धर्म के मुद्दे पर धर्माचार्यों से बात होनी चाहिए, वो बदलाव की बात को समझते हैं.

संघ प्रमुख ने कहा कि ये परंपरा है, उसके पीछे कई कारण होते हैं. कोर्ट के फैसले से वहां पर असंतोष पैदा हो गया है. महिलाएं ही इस परंपरा को मानती हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.

सुप्रीम कोर्ट ने सिंतबंर में दिया फैसला

केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर इसी साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. जिसका भगवान अयप्पा के भक्त विरोध कर रहे हैं. बुधवार को मंदिर का मुख्यद्वार खुला लेकिन महिला भक्तों को प्रवेश नहीं करने दिया गया.

क्या है हालात?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं में भगवान अयप्पा के दर्शन को लेकर भारी उत्साह था, लेकिन महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकने के लिए बुधवार को सबरीमाला के आसपास कई जगह हिंसक प्रदर्श हुए. मीडिया पर भी हमला किया गया. महिलाओं के प्रवेश को लेकर विरोध जारी है. सुरक्षा में पुलिस बल तैनात किए गए हैं.

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