भारतीय IT प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सस्पेंड किया H1-B वीजा

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी (Corona Panadamic) से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Us President0 ने अपने देश में बढ़ी बेरोजगारी दर के चलते भारत को बड़ा झटका दिया है. अमेरिका ने H1-B वीजा पर पाबंदी की घोषणा कर दी है. यूएस (US) के इस फैसले के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका लगा है.

यूएस ने इसकी घोषणा करते हुए H1-B वीजा पर 31 दिसंबर 2020 तक पाबंदी लगा दी है. ट्रंप ने सोमवार को ग्रीन कार्ड स्थगन अवधि को साल के अंत तक बढ़ाने के साथ ही नॉन-इमिग्रेंट वीजा जैसे एच-1बी को भी इस दायरे में लाने वाला एक आदेश जारी कर दिया है.

व्हाइट हाउस (White House) ने बयान जारी कर कहा, अमेरिका योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली की ओर बढ़ रहा है.” ट्रंप सरकार अधिक-कुशल श्रमिकों को प्राथमिकता देने और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की सुरक्षा के लिए आव्रजन प्रणाली में सुधार करेगा. इसका मकसद पहले अमेरिकी नागरिकों को नौकरी मुहैया करान है.

भारतीय IT प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा नुकसान

एच-4 वीजा सस्पेंशन का भी सबसे अधिक प्रभाव हिन्दुस्तानियों पर ही पड़ेगा. एच-1बी वीजा धारक के पत्नी को ग्रीन कार्ड मिलने तक वर्क परमिट की सुविधा देता है. भारतीय इस वीजा का सबसे अधिक लाभ उठाते हैं. 2015 में बराक ओबामा ने H-4 वीजा को लागू किया था. लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे खत्म करना चाहता है.

यदि एच-1बी वीजा में स्थायी परिवर्तन कर दिया जाता है तो ये भारतीय प्रफेशनल्स (Indian IT Professionals) पर सबसे बुरा और देर तक असर करने वाला होगा. ऐसे में वीजा पर लगाई गई पाबंदी का सीधा असर भारत को होगा. भारत (India0 को इससे सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है.

क्या है एच-1बी वीजा
एच-1बी वीजा (H-1B Visa) एक गैर-प्रवासी वीजा है. अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को ये वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो. इस वीजा की वैलिडिटी छह साल की होती है. वीजा (Visa0 खत्म होने के बाद वहां काम कर रहे व्यक्ति को अमेरिका में नागरिकता के लिए आवेदन करना होता है, जिसके बाद आवेदक को ग्रीन कार्ड दिया जाता है.